Jharkhand Organic Farming: जैविक किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार, नई SOP से बढ़ेंगी संभावनाएं

By Tamishree Mukherjee

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सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड में पारंपरिक और प्राकृतिक तरीके से खेती करने वाले किसानों के साथ-साथ जंगलों से प्राकृतिक उत्पाद जुटाने वाले संग्राहकों के लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं। भारत सरकार ने जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए नई Standard Operating Procedure (SOP) जारी की है। इसका उद्देश्य बेहतर प्रदर्शन करने वाले जैविक खेती क्लस्टरों, किसान समूहों, FPO और स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करना और उनके उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाना है।

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केंद्र सरकार की नई व्यवस्था में झारखंड जैसे पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इससे राज्य के जैविक और प्राकृतिक उत्पादों को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने की दिशा में काम किया जा सकता है।

पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों पर विशेष फोकस

नई SOP के तहत ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां किसान पारंपरिक और प्राकृतिक तरीके से खेती कर रहे हैं। झारखंड के कई ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में आज भी खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल अपेक्षाकृत कम किया जाता है।

सरकार की योजना बेहतर प्रदर्शन करने वाले किसान समूहों, जैविक क्लस्टरों, Farmer Producer Organisations (FPOs) और Self Help Groups (SHGs) को चिन्हित कर उन्हें बाजार से जोड़ने की है। इन समूहों के उत्पादों को पहले घरेलू बाजार के लिए तैयार किया जाएगा और इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच बनाने की कोशिश होगी।

NPOP Certification से आसान हो सकती है अंतरराष्ट्रीय बाजार की राह

जैविक उत्पादों को विदेशों में बेचने के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार प्रमाणन जरूरी होता है। इसके लिए National Programme for Organic Production (NPOP) सर्टिफिकेशन महत्वपूर्ण है।

नई व्यवस्था में NPOP Certification की प्रक्रिया को किसानों और उत्पादक समूहों के लिए आसान बनाने पर जोर दिया गया है। सरकार वित्तीय सहायता के जरिए किसान समूहों और उत्पादकों को प्रमाणन हासिल करने में मदद कर सकती है।

इससे ऐसे किसान और समूह, जिनके पास फिलहाल केवल PGS Certification है, उनके लिए भी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने की संभावना बढ़ सकती है। यूरोप, अमेरिका और मिडिल ईस्ट जैसे बाजारों में प्रमाणित जैविक उत्पादों की मांग को देखते हुए यह व्यवस्था झारखंड के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

Cold Storage और Processing Unit से कम होगा नुकसान

झारखंड में टमाटर, मटर, विभिन्न सब्जियों और मोटे अनाज यानी Millets का उत्पादन होता है। लेकिन पर्याप्त भंडारण और प्रोसेसिंग की सुविधा नहीं होने के कारण किसानों को कई बार अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ती है या उत्पाद खराब हो जाते हैं।

नई व्यवस्था के तहत चयनित जैविक और प्राकृतिक खेती क्लस्टरों में Cold Storage, Processing Unit, Grading, Packaging और Drying जैसी सुविधाओं के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की योजना है।

PKVY और RKVY जैसी योजनाओं के माध्यम से क्लस्टरों में आधारभूत ढांचा विकसित होने से किसानों को अपनी उपज को बेहतर तरीके से सुरक्षित रखने और बाजार के हिसाब से तैयार करने में मदद मिल सकती है।

महुआ, चिरौंजी और करंज जैसे वन उत्पादों को मिलेगा बाजार

झारखंड के जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे प्राकृतिक उत्पाद मिलते हैं, जिनसे स्थानीय समुदायों की आजीविका जुड़ी हुई है। इनमें महुआ, चिरौंजी, करंज और करंज हनी जैसे उत्पाद प्रमुख हैं।

नई नीति के तहत ऐसे प्राकृतिक और पारंपरिक उत्पादों की पहचान कर उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा सकता है। इसके साथ ही राज्य के विशिष्ट और GI Tag वाले उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रमोट करने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। इसका फायदा उन स्थानीय संग्राहकों को मिल सकता है, जो जंगलों से प्राकृतिक उत्पाद जुटाकर अपनी आजीविका चलाते हैं।

National Brand से जुड़ सकते हैं झारखंड के जैविक उत्पाद

झारखंड के जैविक उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए National Cooperative Organics Limited (NCOL) के ‘National Brand’ से जोड़ने की योजना भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इसके जरिए किसानों के उत्पादों को बड़ी कंपनियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और घरेलू रिटेल चेन तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। बेहतर Packaging, Branding और Certification के जरिए झारखंड के उत्पादों को एक अलग पहचान देने की कोशिश की जाएगी।

अगर यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो किसानों को बाजार तक सीधी पहुंच मिलने और बिचौलियों पर निर्भरता कम होने की संभावना है।

किसानों के साथ वन उत्पाद संग्राहकों को भी फायदा

सिधकोफेड के सचिव राकेश कुमार सिंह के अनुसार, झारखंड के जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे उत्पाद मौजूद हैं, जो प्राकृतिक और जैविक रूप से तैयार होते हैं। नई केंद्रीय व्यवस्था से इन उत्पादों को बेहतर बाजार और प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

इसका सीधा लाभ केवल जैविक खेती करने वाले किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जंगलों से प्राकृतिक उत्पाद जुटाने वाले स्थानीय संग्राहकों को भी बाजार उपलब्ध हो सकता है।

Jharkhand Organic Farming: क्या बदल सकता है?

नई SOP के प्रभावी क्रियान्वयन से झारखंड में:

  • जैविक और प्राकृतिक खेती के क्लस्टर मजबूत हो सकते हैं।
  • किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकता है।
  • NPOP Certification हासिल करना आसान हो सकता है।
  • Cold Storage और Processing जैसी सुविधाएं बढ़ सकती हैं।
  • महुआ, चिरौंजी और करंज जैसे वन उत्पादों को नई पहचान मिल सकती है।
  • जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल सकती है।
  • किसानों और स्थानीय वन उत्पाद संग्राहकों की बाजार पर निर्भरता मजबूत हो सकती है।

कुल मिलाकर, केंद्र की नई SOP झारखंड के जैविक किसानों, FPO, स्वयं सहायता समूहों और वन उत्पाद संग्राहकों के लिए बाजार विस्तार का नया रास्ता खोल सकती है। हालांकि इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य में क्लस्टरों की पहचान, प्रमाणन, इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार से जोड़ने की प्रक्रिया कितनी प्रभावी तरीके से लागू होती है।

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