सोशल संवाद / रांची : झारखंड पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी पुलिसकर्मियों को एसीपी और एमएसीपी का वित्तीय लाभ देने में आने वाली सभी प्रशासनिक अड़चनें दूर कर दी हैं।

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डीजीपी तदाशा मिश्रा द्वारा जारी नए आदेश के तहत अब वित्तीय लाभ की स्वीकृति के लिए प्रोन्नति के समतुल्य अनिवार्य योग्यता, पात्रता व प्रशिक्षण जैसी शर्तों की बाध्यता को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। डीजीपी ने इस संबंध में पुलिस मुख्यालय को 17 नवंबर 2021 को जारी अपने पुराने आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।
सरकार ने बदला नियमः
झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन बनाम झारखंड राज्य के मामले में हाईकोर्ट द्वारा 16 अगस्त 2024 को दिए गए आदेश व उसके बाद उत्पन्न अवमाननावाद (सिविल) के आलोक में निर्णय लिया गया है। हाईकोर्ट ने फैसले में स्पष्ट किया था कि एसीपी योजना 5वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिश पर ग्रुप-सी और डी कर्मियों के लिए लागू की गई थी।
इसका उद्देश्य उन कर्मियों को 12 व 24 वर्ष की नियमित सेवा पूरी करने पर वित्तीय लाभ देना था। यह योजना वास्तव में कोई प्रमोशन नहीं है, बल्कि एक ही स्थान पर रहते हुए वित्तीय स्तरोन्नयन मात्र है। इसलिए वित्तीय लाभ देने के लिए अगले उच्च पद के लिए निर्धारित उच्च योग्यता या प्रशिक्षण की शर्त थोपना इस पूरी योजना के मूल उद्देश्य को ही विफल कर देता है।
महाधिवक्ता और गृह विभाग की हरी झंडी
हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से राज्य के महाधिवक्ता से कानूनी परामर्श मांगा गया था। महाधिवक्ता ने अपनी राय में कहा कि यह मामला शीर्ष कोर्ट के फैसलों से आच्छादित है,
इसलिए हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन होना चाहिए। एसीपी या एमएसीपी कोई मूल प्रोन्नति नहीं है, इसलिए इसमें ट्रेनिंग या पात्रता की कड़ाई आड़े नहीं आनी चाहिए। इसके बाद गृह विभाग के पत्र के जरिये प्राप्त निर्देशों के आधार पर पुलिस मुख्यालय ने यह अंतिम आदेश जारी कर दिया।










