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Jharkhand Private Hospital: निजी अस्पतालों पर बढ़ेगी निगरानी, 72 घंटे में देना होगा मरीज का मेडिकल रिकॉर्ड

By Tamishree Mukherjee

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सोशल संवाद / रांची: झारखंड में निजी अस्पतालों और क्लिनिकों के पंजीकरण और निगरानी की व्यवस्था में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। नई व्यवस्था में मरीजों के अधिकारों और मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने से जुड़े प्रावधानों को भी शामिल किया जा रहा है।

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प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मरीज या उसके अधिकृत परिजन की मांग पर अस्पताल को 72 घंटे के भीतर मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध कराना होगा। इसके साथ ही अस्पतालों और क्लिनिकों की जानकारी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और नियमों के पालन की निगरानी को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

ऑनलाइन होगी अस्पतालों के पंजीकरण और निगरानी की प्रक्रिया

स्वास्थ्य विभाग अब निजी अस्पतालों और क्लिनिकों के पंजीकरण से लेकर उनकी निगरानी तक की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और डिजिटल बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को मौजूदा व्यवस्था का अध्ययन कर एक सप्ताह के भीतर नई व्यवस्था का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। नई व्यवस्था में अस्पतालों और क्लिनिकों के पंजीकरण, उनके रिकॉर्ड, नियमों के अनुपालन और निरीक्षण की प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर जोर रहेगा।

मरीजों को समय पर मिलेगा मेडिकल रिकॉर्ड

प्रस्तावित बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड से जुड़ा है। अस्पताल में इलाज करा चुके मरीज या उसके अधिकृत परिजन को रिकॉर्ड के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मरीज या उसके अधिकृत परिजन की मांग पर अस्पताल को 72 घंटे के अंदर मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध कराना होगा। इससे इलाज, जांच, दवाओं और अस्पताल में भर्ती से जुड़े दस्तावेज मरीज के पास समय पर उपलब्ध हो सकेंगे।

पांच सदस्यीय समिति करेगी नियमों में बदलाव का प्रस्ताव

नई व्यवस्था तैयार करने के लिए बनाई गई समिति की अध्यक्षता स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा करेंगी। समिति में अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह, निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, संयुक्त सचिव अनुज कुमार प्रसाद और KPMG के एक प्रतिनिधि को शामिल किया गया है।

समिति मौजूदा नियमों की समीक्षा कर उनमें जरूरी बदलाव का प्रस्ताव तैयार करेगी। इसमें अस्पतालों के पंजीकरण, रिकॉर्ड रखने, नियमों के अनुपालन और निगरानी की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर फोकस रहेगा।

निजी अस्पताल से मेडिकल रिकॉर्ड नहीं मिलने के बाद उठा मामला

इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत एक ऐसे मामले के बाद हुई, जिसमें रांची निवासी एक व्यक्ति ने अपने पिता की वर्ष 2017 में एक निजी अस्पताल में हुई मृत्यु के बाद इलाज से संबंधित पूरा मेडिकल रिकॉर्ड मांगा था। आरोप है कि अस्पताल की ओर से उन्हें रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य में संचालित अस्पतालों और क्लिनिकों के पंजीकरण तथा उनकी निगरानी की व्यवस्था पर भी ध्यान गया।

हाईकोर्ट ने अस्पतालों का रजिस्टर तैयार करने का दिया निर्देश

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में संचालित सभी अस्पतालों और क्लिनिकों का रजिस्टर तैयार करने और उसे नियमित रूप से अपडेट करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अस्पतालों और क्लिनिकों की निगरानी के लिए विशेषज्ञों की फ्लाइंग स्क्वॉड बनाने का सुझाव भी दिया है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में नियमों के पालन की नियमित जांच और निगरानी को प्रभावी बनाना है।

डिजिटल निगरानी से क्या होगा फायदा?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद निजी अस्पतालों और क्लिनिकों से जुड़ी जानकारी एक डिजिटल सिस्टम में उपलब्ध कराने की योजना है। इससे पंजीकरण की स्थिति, संस्थान से जुड़ी जानकारी और नियमों के अनुपालन की निगरानी आसान हो सकती है।

साथ ही मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड से जुड़े अधिकारों को स्पष्ट करने और रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की समिति के मसौदे के बाद यह स्पष्ट होगा कि नई व्यवस्था में अस्पतालों के पंजीकरण, निरीक्षण, रिकॉर्ड और मरीजों के अधिकारों को लेकर कौन-कौन से नियम लागू किए जाते हैं।

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