सोशल संवाद/डेस्क : चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात की। गलवान झड़प के बाद यह जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा है। BRICS समिट में शामिल होने के बाद वह आज शाम पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।
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जिनपिंग के भारत पहुंचने से पहले चीन ने स्टेटमेंट जारी कर कहा- हम भारत के साथ बातचीत बढ़ाकर और आपसी मतभेदों को सुलझाकर काम करने के लिए तैयार हैं। जिनपिंग 11 अक्टूबर 2019 को भारत आए थे। 15 जून 2020 को गलवान झड़प हुई थी। इसके बाद भारत-चीन रिश्तों में तनाव बढ़ा, लेकिन कारोबार नहीं रुका।
2020-21 में चीन से भारत का आयात करीब 65 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 132 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया। यानी गलवान झड़प के बाद चीन से आयात दोगुना हो गया है।
जिनपिंग के साथ भारत आए चीन के दूसरे बड़े नेता
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कै शी भी भारत आए हैं। वे चीन की सत्ता के दूसरे सबसे बड़े नेता में शामिल हैं। वह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सबसे बड़ी सात सदस्यीय टीम (पॉलिटब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी) का हिस्सा हैं और पार्टी के जनरल ऑफिस के डायरेक्टर यानी सीधे तौर पर शी जिनपिंग के ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ के रूप में काम करते हैं।
उनकी मुख्य जिम्मेदारी चीन के पूरे प्रशासनिक सिस्टम, राष्ट्रीय सुरक्षा और पार्टी के प्रचार तंत्र (प्रोपोगैंडा और मीडिया) को कंट्रोल करने की है। इसके अलावा शी जिनपिंग की सुरक्षा, उनके दैनिक कामकाज और देश में पार्टी की विचारधारा को सख्ती से लागू करवाने का जिम्मा भी उन्हीं के पास है।
कै शी कम्युनिस्ट पार्टी के सेंट्रल कमेटी के जनरल ऑफिस के प्रमुख हैं। यह पार्टी के सबसे बड़े नेताओं के कामकाज को संभालने वाला दफ्तर है। यहां बड़े नेताओं की मीटिंग, जरूरी कागज और सूचनाओं से जुड़े काम देखे जाते हैं।
यानी बड़े नेता कब मिलेंगे, कौन-सी बैठक होगी और उससे जुड़े जरूरी दस्तावेज तैयार करने से लेकर कई दूसरे काम इसी दफ्तर के जरिए होते हैं।
कै शी इसी दफ्तर के मुखिया हैं। यानी उनका काम सीधे शी जिनपिंग और पार्टी के दूसरे बड़े नेताओं के रोजमर्रा के कामकाज से जुड़ा है। इसी वजह से उन्हें शी जिनपिंग का ‘डी फैक्टो चीफ ऑफ स्टाफ’ कहा जाता है।










