सोशल संवाद / रांची : झारखंड में JSSC CGL परीक्षा और नियुक्तियों को लेकर चल रहे विवाद में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार के उस फैसले को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा और इसके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द किया गया था। इस फैसले से परीक्षा में सफल होकर सरकारी नौकरी पाने वाले हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिली है।
झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने स्पष्ट किया कि अधूरी जांच के आधार पर पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करना उचित नहीं है। अदालत के अनुसार, यदि कुछ अभ्यर्थियों के खिलाफ अनियमितता के आरोप हैं, तो जांच के बाद उनकी पहचान कर अलग-अलग कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन कुछ लोगों की कथित गड़बड़ी के लिए सभी सफल अभ्यर्थियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
18 अगस्त को सरकार ने रद्द की थी परीक्षा
दरअसल, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा का आयोजन 21 और 22 सितंबर 2024 को किया था। परीक्षा के बाद पेपर लीक और अन्य कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद शुरू हुआ। अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों ने परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए आंदोलन किया था।
इसके बाद राज्य सरकार ने 18 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी कर JSSC CGL सहित कुल 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार ने अपने निर्णय के समर्थन में सीआईडी जांच रिपोर्ट और परीक्षा में कथित अनियमितताओं का हवाला दिया था।
सफल अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
सरकार के इस फैसले के खिलाफ आकाश गौरव समेत कई सफल अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यदि परीक्षा में कुछ लोगों की ओर से गड़बड़ी की गई है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके लिए पूरी परीक्षा और सभी सफल अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द करना उचित नहीं है।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने के लिए सरकार पर्याप्त ठोस आधार प्रस्तुत नहीं कर सकी।
जांच जारी रहेगी, दोषियों पर हो सकती है कार्रवाई
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितताओं की जांच जारी रहेगी। जांच में जिन अभ्यर्थियों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि जांच में निर्दोष अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए।
इस फैसले से JSSC CGL के तहत चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से नौकरी और भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच हाईकोर्ट का यह आदेश उनके लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ है।











