सोशल संवाद / डेस्क : असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व (KNPRTR) के आसपास पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र यानी ESZ को 10 किलोमीटर से घटाकर 1 किलोमीटर करने के प्रस्ताव ने पर्यावरण और विकास के बीच नई बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का कहना है कि राज्य सरकार का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होगा।
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मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार करीब दो महीने के भीतर केंद्र को ESZ की सीमा 10 किलोमीटर से घटाकर 1 किलोमीटर करने का प्रस्ताव भेज सकती है। सरकार का तर्क है कि मौजूदा 10 किलोमीटर की सीमा के कारण काजीरंगा के आसपास बसे कई कस्बों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
क्या बोले हिमंता बिस्वा सरमा?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के मुताबिक, जब तक राज्य सरकार ESZ को औपचारिक रूप से अधिसूचित नहीं करती, तब तक काजीरंगा के आसपास 10 किलोमीटर की सीमा लागू मानी जाती है। उनके अनुसार, अधिसूचना के बाद यह सीमा 1 किलोमीटर हो सकती है।
सरमा ने यह भी कहा कि अगर 10 किलोमीटर का क्षेत्र बरकरार रहता है तो कालीबार, डोबोका, जाखलबंधा और बोकाखाट जैसे कस्बों में विकास गतिविधियों पर असर पड़ेगा। उन्होंने क्षेत्र में स्टेडियम निर्माण जैसे प्रोजेक्ट के लिए भी ESZ सीमा में बदलाव को जरूरी बताया।
सुप्रीम कोर्ट के ESZ आदेश को लेकर क्या है स्थिति?
जून 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने संरक्षित वनों, राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास कम से कम 1 किलोमीटर का ESZ रखने का निर्देश दिया था।
हालांकि, अप्रैल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के आदेश में बदलाव किया। राज्यों और केंद्र की दलीलों के बाद अदालत ने माना कि हर संरक्षित क्षेत्र में एक समान 1 किलोमीटर का नियम लागू करना व्यावहारिक नहीं हो सकता। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष और स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई थी। हालांकि, अदालत ने संरक्षित क्षेत्रों की सीमा से 1 किलोमीटर के भीतर खनन गतिविधियों पर रोक बरकरार रखी थी।
काजीरंगा में विकास बनाम वन्यजीव संरक्षण की बहस
ESZ घटाने के प्रस्ताव का वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ताओं ने विरोध किया है। उनका कहना है कि काजीरंगा सिर्फ असम के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्र है। पद्मश्री से सम्मानित पर्यावरणविद् जादव पायेंग ने प्रस्ताव पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि काजीरंगा में हर साल बाढ़ आती है और इस दौरान गैंडे, हिरण और हाथी जैसे वन्यजीव सुरक्षित ऊंचे इलाकों की ओर जाते हैं।
उनके मुताबिक, अगर आसपास का संरक्षित क्षेत्र छोटा कर दिया गया तो वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन में बाधा आ सकती है और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने का खतरा रहेगा।
संरक्षणवादियों ने क्या कहा?
वन्यजीव संरक्षण संगठन आरण्यक के महासचिव बिभब तालुकदार ने कहा कि ESZ को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों और बाद के संशोधनों को उनकी मूल भावना के साथ समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि काजीरंगा जैसे राष्ट्रीय उद्यानों के दीर्घकालिक संरक्षण के साथ-साथ संरक्षित क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों की आजीविका और विकास संबंधी जरूरतों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
काजीरंगा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ESZ?
ESZ का मुख्य उद्देश्य संरक्षित क्षेत्रों के आसपास ऐसी गतिविधियों को नियंत्रित करना है, जिनसे वन्यजीवों और प्राकृतिक पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। काजीरंगा में यह क्षेत्र खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में एक सींग वाले गैंडे, हाथी, हिरण और अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं।
अब असम सरकार के प्रस्ताव के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या काजीरंगा के आसपास ESZ की सीमा 10 किलोमीटर से घटकर 1 किलोमीटर होगी और इसका वन्यजीव संरक्षण पर क्या असर पड़ेगा? आने वाले दिनों में राज्य सरकार के प्रस्ताव और केंद्र की मंजूरी से इस पर तस्वीर साफ हो सकती है।









