सोशल संवाद / रांची : राजधानी रांची में फर्जी दस्तावेज के आधार पर जमीन की खरीद-बिक्री मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अपना शिकंजा और कस दिया है। ईडी के आग्रह पर सबसे महंगे और पॉश इलाके में आने वाले आठ मौजा मोरहाबादी, बरियातू, कोकर, तिरिल, सांगा, संग्रामपुर, बुकरू और नगड़ी में जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गई है। इनके म्यूटेशन पर भी तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया गया है। इस संबंध में जांच एजेंसी ने रांची के जिला अवर निबंधक और लिखा था। इसके बाद यह कार्रवाई संबंधित अंचल अधिकारियों को पत्र की गई है।

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राज्य के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान रिम्स के विस्तार के लिए दशकों पहले जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इस सरकारी जमीन को भू-माफिया, बिचौलियों और अंचल कार्यालय के अधिकारियों-कर्मचारियों ने साठगांठ कर फर्जी कागजात के आधार पर इस जमीन को बेच दिया। ईडी को पता चला है कि भू-माफिया जांच की आंच से बचने के लिए विवादित जमीन को टुकड़ों में काटकर नए खरीदारों को फंसाने आऔर साक्ष्य मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद यह कदम उठाया गया।
रिम्स की 9.65 एकड़ जमीन मामले की जांच धीमी
रिम्स की 9.65 एकड़ जमीन की अवैध खरीद बिक्री के मामले में झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर 5 जनवरी को एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज कर छानबीन शुरू की थी। इस मामले में एसीबी ने जब जांच को आगे बढ़ाया तो इसमें कई कई रसूखदार चेहरों, बिल्डरों और सरकारी अधिकारियों- कर्मियों की भी भूमिका सामने आने लगी। एसीबी ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। जबकि मुख्य आरोपी प्रमोद अभी भी फरार है। इस मामले में एसीबी ने एक दर्जन सरकारी अधिकारियों व कर्मियों से पूछताछ के लिए निगरानी एवं 1 मंत्रिमंडल विभाग से पूछताछ के लिए अनुमति मांगी है। लेकिन अबतक एसीबी को अनुमति नहीं मिली है। इस वजह से इस मामले में एसीबी के अनुसंधान की गति धीमी पड़ी है।
कांके अंचल में ऑनलाइन भू-अभिलेख में हुई थी हेरफेर, साइबर थाना में दर्ज हुआ है केस
साइबर थाना रांची में 29 जून 2026 को कांके अंचल में ऑनलाइन भू-अभिलेख हेरफेर और फर्जी जमाबंदी मामला दर्ज हुआ है। कांके के वर्तमान अंचल अधिकारी ने इससे संबंधित केस दर्ज कराया है, जो गारू मौजा में खाता संख्या 56 के अंतर्गत आने वाली लगभग 1.28 एकड़ से संबंधित है। एफआईआर में आरोप है कि नियमित जांच के दौरान अंचल अधिकारी ने पाया कि सरकारी झारभूमि पोर्टल के ऑनलाइन रजिस्टर-2 और मूल भौतिक भू-अभिलेखों के बीच गंभीर विसंगतियां थीं।
साइबर अपराधियों और भू-माफिया ने तत्कालीन राजस्व कर्मियों की फर्जी यूजर आईडी और पासवर्ड का अवैध रूप से इस्तेमाल कर या लॉगिन का दुरुपयोग कर ऑनलाइन डेटाबेस में बदलाव किए। इसके जरिए फर्जी तौर पर डिमांड खोला गया ताकि गैर-बिक्री योग्य या संदिग्ध जमीनों की अवैध रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज कराई जा सके। इस मामले में झारभूमि पोर्टल से जुड़े वर्तमान व पूर्व सॉफ्टवेयर डेवलपर्स, तकनीकी कर्मियों को भी जांच के घेरे में रखा गया है।
चामा मौजा में 200 एकड़ जमीन घोटाला की भी चल रही जांच
ईडी रांची में वर्ष 2023 से ही जमीन घोटाला की जांच कर रहा है। इसमें कांके अंचल के चामा मौजा में 200 एकड़ जमीन घोटाले की जांच शामिल है। रांची के सदर, बड़गाईं, कांके और पंडरा थाने में भू-माफिया, बिचौलियों और सरकारी अधिकारियों- कर्मियों के खिलाफ पूर्व में कई केस दर्ज किए गए थे। इन केसों में सरकारी रजिस्टर-2 के पन्ने फाड़ने, जालसाजी करने और डिजिटल डेटा बदलने के गंभीर आरोप थे। जांच एजेंसी ने पूर्व में जमीन घोटाला में इन्हीं केसों के आधार पर ईसीआईआर नंबर 06/2023 दर्ज किया था। जिसकी जांच पहले से ही चल रही है।










