सोशल संवाद / डेस्क : लद्दाख में शराब की बिक्री और आबकारी नीति को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। ऑल लद्दाख लिकर ट्रेडर्स एसोसिएशन ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के लद्दाख को शराब मुक्त क्षेत्र यानी ‘ड्राई रीजन’ बनाने की मांग पर सवाल उठाए हैं। कारोबारियों ने उनके सेब से बनी वाइन के ब्रांड ‘उले टोपो’ (Ule Topo) के लाइसेंस को लेकर भी प्रशासन से जवाब मांगा है।
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शराब कारोबारियों ने क्या आरोप लगाए?
एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने 31 अक्टूबर को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वांगचुक एक तरफ लद्दाख में शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार से जुड़े बताए जा रहे सेब की वाइन के ब्रांड ‘उले टोपो’ को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कारोबारियों ने पूछा कि क्या इस ब्रांड के पास शराब बेचने के लिए जरूरी सरकारी लाइसेंस है? यदि लाइसेंस नहीं है, तो प्रशासन ने अब तक इस मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की? हालांकि, ये एसोसिएशन की ओर से लगाए गए आरोप और सवाल हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
चांग को लेकर भी उठाए सवाल
एसोसिएशन के एक प्रतिनिधि ने वांगचुक के शराब को लेकर रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने पारंपरिक मादक पेय ‘चांग’ के बारे में सकारात्मक बातें कही हैं, जबकि दूसरी ओर शराब की बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।
कारोबारियों ने पूछा कि यदि शराब पर प्रतिबंध की बात हो रही है, तो नशीले पदार्थों, धूम्रपान और मांस सेवन जैसे दूसरे मुद्दों पर भी समान रूप से चर्चा क्यों नहीं होनी चाहिए। एसोसिएशन का कहना है कि सभी गतिविधियों पर समान नियम लागू होने चाहिए।
नई आबकारी नीति को लेकर क्यों है विवाद?
लद्दाख में 1 जून 2026 को नई आबकारी नीति 2026-27 लागू की गई थी। इसमें शराब की खुदरा दुकानों की संख्या दो से बढ़ाकर 20 करने का प्रस्ताव था। इस फैसले का स्थानीय संगठनों और महिला समूहों ने विरोध किया था।
सोनम वांगचुक ने भी इस नीति पर आपत्ति जताई थी और लद्दाख को शराब मुक्त क्षेत्र बनाने की मांग का समर्थन किया था। इसके बाद 26 अगस्त 2026 को प्रशासन ने नई आबकारी नीति वापस ले ली और पुरानी आबकारी नीति 2025-26 को फिर से लागू कर दिया।
प्रशासन ने शराब की दुकानों को लेकर क्या कहा?
लद्दाख प्रशासन ने 28 अक्टूबर को जारी बयान में स्पष्ट किया था कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश में फिलहाल केवल एक शराब की दुकान संचालित है। प्रशासन के अनुसार, लेह के वार्ड नंबर 6 में एक दुकान नीलामी के बाद शुरू हुई, जबकि वार्ड नंबर 4 में कोई बोली नहीं मिलने के कारण दुकान नहीं खुली।
प्रशासन ने यह भी बताया कि लद्दाख में रेस्तरां से जुड़े 50 शराब बिक्री केंद्र और लेह में दो बीयर बार संचालित हैं। प्रशासन के मुताबिक, बार और होटल को लाइसेंस तय नियमों और शैक्षणिक व धार्मिक संस्थानों से दूरी के मानकों के आधार पर दिए जाते हैं।
कारोबारियों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
एसोसिएशन ने प्रशासन से ‘उले टोपो’ ब्रांड के लाइसेंस और बिक्री से जुड़े आरोपों की जांच करने की मांग की है। कारोबारियों का कहना है कि शराब का कारोबार सरकारी लाइसेंस के तहत चलता है और इससे जुड़े लोगों की आजीविका भी प्रभावित होती है।
फिलहाल वाइन ब्रांड के लाइसेंस को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में सोनम वांगचुक का पक्ष भी सामने आना बाकी है।











