सोशल संवाद / रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्वी सिंहभूम के पारा शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने शैक्षणिक प्रमाण पत्र को लेकर उठे सवालों के आधार पर पारा शिक्षकों को सेवा से हटाने और उनका मानदेय रोकने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने संबंधित पारा शिक्षकों को अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय का भुगतान करने का भी निर्देश दिया है।
शैक्षणिक प्रमाण पत्र को लेकर उठा था विवाद
मामला कुछ पारा शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ा था। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ शिक्षकों ने इलाहाबाद और देवघर के संस्थानों से मैट्रिक और इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र हासिल किए थे। इन प्रमाण पत्रों की मान्यता को लेकर सवाल उठाए गए थे।
इनमें इंटर प्रयाग महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद, हिंदी महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद और हिंदी विद्यापीठ, देवघर जैसे संस्थानों के प्रमाण पत्र शामिल थे।
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने जारी किया था पत्र
इन प्रमाण पत्रों के आधार पर कक्षा 1 से 5 और कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वाले पारा शिक्षकों की शैक्षणिक अर्हता पर सवाल उठे। इसके बाद झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने 7 नवंबर 2025 को पत्र जारी किया था।
इसके आधार पर राज्य के अलग-अलग जिलों के जिला शिक्षा अधीक्षकों को संबंधित पारा शिक्षकों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे।
पूर्वी सिंहभूम में हटाने और मानदेय रोकने का आदेश
इसी क्रम में पूर्वी सिंहभूम के जिला शिक्षा अधीक्षक ने संबंधित पारा शिक्षकों को काम से हटाने और उनका मानदेय रोकने का आदेश जारी किया था।
इस कार्रवाई के खिलाफ मेरी मुर्मू और अन्य पारा शिक्षकों ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार ने अदालत में पक्ष रखा। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पारा शिक्षकों को सेवा से हटाने और मानदेय रोकने संबंधी जिला शिक्षा अधीक्षक के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही कोर्ट ने अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय का भुगतान करने का निर्देश दिया।
इस फैसले से पूर्वी सिंहभूम के प्रभावित पारा शिक्षकों को नौकरी और बकाया मानदेय दोनों के मामले में राहत मिली है।
पारा शिक्षकों के लिए क्या मायने रखता है फैसला?
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद संबंधित पारा शिक्षकों को सेवा से हटाने की कार्रवाई प्रभावी नहीं रहेगी और अप्रैल 2025 से लंबित मानदेय के भुगतान का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, यह आदेश मामले में याचिका दाखिल करने वाले संबंधित शिक्षकों के संदर्भ में है; इसे पूरे राज्य के सभी पारा शिक्षकों पर स्वतः लागू होने वाला सामान्य आदेश नहीं माना जाना चाहिए।












