सोशल संवाद / डेस्क : AI के वजह से टेक्नोलॉजी की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब वह दिन दूर नहीं जब किसी यूजर के गुजर जाने के बाद भी उसके सोशल मीडिया अकाउंट एक्टिव रह सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Meta Platforms ने एक ऐसा AI सिस्टम विकसित किया है, जिसे लेकर कंपनी ने पेटेंट भी हासिल कर लिया है। यह सिस्टम यूजर की डिजिटल गतिविधियों के आधार पर उसकी तरह व्यवहार कर सकेगा।
यह भी पढे : OpenAI ने लॉन्च किए ChatGPT के दो नए सिक्योरिटी फीचर: लॉकडाउन मोड और एलीवेटेड रिस्क वार्निंग
इसका मतलब है कि भविष्य में एआई जनरेटेड पोस्ट, मैसेज, यहां तक कि ऑडियो और वीडियो कॉल भी यूजर की शैली में जारी रह सकती हैं भले ही वह व्यक्ति अब इस दुनिया में न हो।
कैसे काम करेगा Meta का AI सिस्टम?
पेटेंट जानकारी के अनुसार, यह AI मॉडल यूजर की:
- टोन और भाषा शैली
- पसंद-नापसंद
- बिहेवियर पैटर्न
- पोस्ट और कमेंटिंग स्टाइल
को गहराई से समझेगा।

एक बार ट्रेनिंग पूरी होने के बाद, यह सिस्टम:
- अन्य यूजर्स की पोस्ट पर ऑटोमैटिक प्रतिक्रिया देगा
- डायरेक्ट मैसेज का जवाब देगा
- अकाउंट पर कंटेंट अपडेट करेगा
- यूजर की डिजिटल उपस्थिति को बनाए रखेगा
यह सिस्टम सिर्फ मृत्यु के बाद ही नहीं, बल्कि उस स्थिति में भी उपयोगी हो सकता है जब कोई यूजर सोशल मीडिया से लंबा ब्रेक लेना चाहता हो। खासकर कंटेंट क्रिएटर्स और इंफ्लुएंसर्स के लिए यह फीचर फायदेमंद माना जा रहा है, क्योंकि उनके अकाउंट नियमित रूप से अपडेट होते रहेंगे।
टेक्स्ट से आगे: AI ऑडियो और वीडियो कॉल
यह तकनीक सिर्फ टेक्स्ट आधारित इंटरेक्शन तक सीमित नहीं है।
AI सिस्टम पुराने ऑडियो-वीडियो डेटा और बिहेवियरल पैटर्न के आधार पर सिंथेटिक आवाज और विजुअल एलिमेंट तैयार करेगा। इससे:
- एआई जनरेटेड ऑडियो कॉल
- वीडियो मैसेज
- वर्चुअल इंटरैक्शन
बिल्कुल असली जैसी लग सकती है।
यह डिजिटल इमोर्टैलिटी (Digital Immortality) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

पहले भी आ चुकी है ऐसी तकनीक
Meta इस दिशा में कदम उठाने वाली पहली कंपनी नहीं है। इससे पहले Microsoft ने 2021 में एक ऐसे चैटबॉट का पेटेंट कराया था, जो किसी व्यक्ति के डिजिटल कंटेंट के आधार पर उसकी तरह प्रतिक्रिया दे सकता था।
अब Meta का यह नया AI सिस्टम इस अवधारणा को और उन्नत स्तर पर ले जाने की तैयारी में है।
टेक्नोलॉजी पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल
हालांकि यह तकनीक बेहद एडवांस मानी जा रही है, लेकिन इससे जुड़े कई नैतिक और कानूनी सवाल भी उठ रहे हैं, जैसे:
- डिजिटल पहचान (Digital Identity) की सुरक्षा
- यूजर की सहमति (Consent)
- मृत्यु के बाद डेटा का उपयोग
- परिवार की अनुमति और गोपनीयता

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी तकनीक लागू करने से पहले स्पष्ट कानूनी ढांचा और मजबूत डेटा प्रोटेक्शन नीतियां जरूरी होंगी।
Meta का यह AI पेटेंट सोशल मीडिया के भविष्य को पूरी तरह बदल सकता है। जहां एक ओर यह टेक्नोलॉजी डिजिटल उपस्थिति को बनाए रखने में मदद करेगी, वहीं दूसरी ओर यह प्राइवेसी और नैतिकता पर नई बहस भी शुरू कर रही है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह AI सिस्टम वास्तव में आम यूजर्स के लिए उपलब्ध होगा और इसके लिए किस तरह के नियम बनाए जाएंगे।










