सोशल संवाद / रांची : झारखंड के वित्त, योजना एवंविकास, वाणिज्य कर तथा संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विधायकों के विशेषाधिकार का दायरा बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने रविवार को विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो को पत्र लिखकर विधानसभा की कार्य संचालन नियमावली में ऐसे प्रावधान जोड़ने का सुझाव दिया है, जिसके तहत विधायकों के साथ जानबूझकर अपमानजनक या अशिष्ट व्यवहार करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई की जा सके।
यह भी पढे : परीक्षा मामला : देवघर में सीआईडी का छापा युवक को लिया हिरासत में
मंत्री ने कहा है कि विधायक जनता के प्रतिनिधि होने के नाते सदन के भीतर विधायी दायित्व निभाने के साथ निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए सदन के बाहर भी अधिकारियों से संवाद करते हैं। ऐसे में सरकारी अधिकारियों का विधायकों के प्रति व्यवहार केवल शिष्टाचार का विषय नहीं, बल्कि विधायिका की गरिमा, प्रतिष्ठा और विशेषाधिकार से भी जुड़ा होना चाहिए।
फोन नहीं उठाने की शिकायतः
किशोर ने पत्र में कहा है कि विधायकों की लगातार शिकायत रहती है कि अधिकारी उनके उचित सुझावों का संज्ञान नहीं लेते। कई बार अधिकारियों द्वारा विधायकों के फोन तक नहीं उठाए जाते और उनके पत्रों पर समय पर कार्रवाई नहीं होती। विधायक-सांसद विभिन्न अवसरों पर राज्यपाल और सरकार के समक्ष भी इस समस्या को उठा चुके हैं। सरकार की ओर से अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ सौजन्यपूर्ण व्यवहार के निर्देश भी दिए गए हैं, लेकिन इनका अपेक्षित असर दिखाई नहीं पड़ रहा है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष की ओर से आयोजित उच्चस्तरीय बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि शून्यकाल, ध्यानाकर्षण, आश्वासन और निवेदन के माध्यम से विधायकों द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब बड़ी संख्या में समय पर नहीं मिलते।
अफसरों पर सख्ती, विधायकों के लिए भी हो समान नियम
वित्त मंत्री ने संविधान के अनुच्छेद 194 का उल्लेख करते हुए कहा कि सदन के भीतर बिना भय और दबाव के जनहित के मुद्दे उठाने के लिए विधायकों को विशेषाधिकार प्राप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिष्टाचार और विशेषाधिकार अलग-अलग विषय हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जानबूझकर विधायक के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल, सरकारी कार्यालय में असम्मानजनक व्यवहार, सदन अथवा सदन के बाहर उठाए गए जनहित के मुद्दों को जानबूझकर टालना तथा प्रोटोकॉल संबंधी सरकारी निर्देशों का अहंकारवश पालन नहीं करना विशेषाधिकार हनन की श्रेणी में शामिल किया जाए।










