कोल्ड्रिंक्स और शुगरी ड्रिंक्स पर अब 40% जीएसटी, शराब और तंबाकू की कैटेगरी में शामिल

Now 40% GST on cold drinks and sugary drinks

सोशल संवाद/डेस्क : भारत सरकार ने जीएसटी (GST) ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए अब कोल्ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, फ्लेवर्ड सोडा, आइस्ड टी और एडेड शुगर वाली नॉन-अल्कोहॉलिक ड्रिंक्स को ‘सिन गुड्स’ (Sin Goods) की श्रेणी में डाल दिया है। इस फैसले के बाद इन सभी उत्पादों पर 18% की बजाय 40% टैक्स लगेगा। इससे इनकी कीमतें बढ़ेंगी और लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

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क्यों लिया गया यह फैसला?

अभी तक सिन गुड्स कैटेगरी में शराब और तंबाकू उत्पाद ही आते थे, लेकिन अब पहली बार शुगर-बेस्ड ड्रिंक्स को भी इसमें शामिल किया गया है। दरअसल, भारत को दुनिया की “डायबिटीज कैपिटल” कहा जाता है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की हालिया स्टडी के मुताबिक, देश की लगभग 11.4% आबादी यानी करीब 10 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। वहीं 15.3% यानी 13 करोड़ से ज्यादा लोग प्री-डायबिटिक हैं। बढ़ते मोटापे और लाइफस्टाइल बीमारियों को देखते हुए सरकार ने यह कदम स्वास्थ्य हित में उठाया है।

चीनी वाली ड्रिंक्स क्यों हैं खतरनाक?

एक बोतल कोला या एक कैन एनर्जी ड्रिंक में जितनी शुगर होती है, वह शरीर की दिनभर की जरूरत से कहीं ज्यादा है। उदाहरण के तौर पर:

कोका-कोला, स्प्राइट, फैंटा जैसी ड्रिंक्स में प्रति 100 मिलीलीटर में 10-15 ग्राम शुगर होती है।

फ्रूटी और माजा जैसे पैकेज्ड जूस में 11-15 ग्राम शुगर पाई जाती है।

रेड बुल जैसे एनर्जी ड्रिंक में प्रति 100 मिलीलीटर में 11 ग्राम शुगर होती है।

जब लोग रोजाना 200-300 मिलीलीटर की 1-2 कैन पीते हैं, तो सिर्फ ड्रिंक्स से ही 250-300 ग्राम तक चीनी शरीर में पहुंच जाती है। यह मात्रा दांतों, लिवर और हार्ट के लिए बेहद खतरनाक है।

शरीर पर असर

शुगर वाली ड्रिंक पीते ही यह ब्लडस्ट्रीम में घुल जाती है। पैंक्रियाज इंसुलिन रिलीज करता है ताकि शुगर कोशिकाओं में पहुंच सके। लेकिन जब यह मात्रा लगातार अधिक हो जाती है, तो शरीर इंसुलिन पर प्रतिक्रिया करना बंद कर देता है। इसे इंसुलिन रेसिस्टेंस कहते हैं, जो आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का कारण बनता है।

इसके अलावा, शुगर का एक हिस्सा सीधे लिवर में जाकर फैट में बदलता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। वहीं ब्लड शुगर लेवल अचानक बढ़ने और फिर गिरने से थकान, चिड़चिड़ापन और ज्यादा मीठा खाने की आदत बन जाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सलाह दी है कि रोजाना 25 ग्राम यानी लगभग 6 चम्मच से ज्यादा चीनी नहीं लेनी चाहिए। लेकिन भारत में औसतन लोग इससे कई गुना ज्यादा शुगर का सेवन करते हैं।

आम लोगों पर असर

जीएसटी स्लैब में बदलाव के बाद कोल्ड्रिंक और शुगरी ड्रिंक महंगी हो जाएंगी। यह कदम एक तरफ सरकार को अतिरिक्त टैक्स रेवेन्यू देगा, वहीं दूसरी ओर लोगों को इनका सेवन कम करने के लिए प्रेरित करेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह पॉलिसी पब्लिक हेल्थ के लिहाज से सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

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