Ooty Toy Train: साइकिल जैसी रफ्तार से 46 KM का सफर, फिर भी इस टॉय ट्रेन में बैठने के लिए बेताब रहते हैं लोग

By Riya Kumari

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Ooty Toy Train: साइकिल जैसी रफ्तार से 46 KM का सफर, फिर भी इस टॉय ट्रेन में बैठने के लिए बेताब रहते हैं लोग

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सोशल संवाद/डेस्क: भारत में ट्रेन का सफर आमतौर पर तेज रफ्तार और कम समय में दूरी तय करने के लिए जाना जाता है। लेकिन तमिलनाडु में चलने वाली मेट्टुपालयम-ऊटी नीलगिरि टॉय ट्रेन इससे बिल्कुल अलग है। यह ट्रेन करीब 46 किलोमीटर का सफर लगभग 5 घंटे में पूरा करती है। इसकी रफ्तार भले ही साइकिल जैसी हो, लेकिन पहाड़ों, सुरंगों, पुलों और चाय के बागानों के बीच से गुजरने वाला इसका सफर पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है।

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10 से 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार

मेट्टुपालयम से ऊटी के बीच चलने वाली नीलगिरि माउंटेन रेलवे की औसत रफ्तार लगभग 10 से 12 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह ट्रेन पहाड़ी रास्तों पर धीरे-धीरे आगे बढ़ती है, जिससे यात्रियों को आसपास के प्राकृतिक नजारों का आनंद लेने का भरपूर मौका मिलता है।

इसका मुख्य आकर्षण सिर्फ मंजिल तक पहुंचना नहीं, बल्कि रास्ते में मिलने वाला खूबसूरत अनुभव है। यही वजह है कि ऊटी और कुन्नूर घूमने आने वाले पर्यटकों के बीच इस टॉय ट्रेन की खास लोकप्रियता है।

250 से ज्यादा पुल और 16 सुरंगों से गुजरती है ट्रेन

नीलगिरि की पहाड़ियों में बने इस रेलमार्ग पर सफर करना इंजीनियरिंग का अनोखा उदाहरण है। इस रूट पर 250 से ज्यादा पुल, 16 सुरंगें और लगभग 208 मोड़ हैं। पहाड़ी ढलानों और तीखे चढ़ावों के कारण ट्रेन की रफ्तार सीमित रखनी पड़ती है।

इस रेलमार्ग पर रैक एंड पिनियन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। यह तकनीक ट्रेन को खड़ी चढ़ाई पर आगे बढ़ने में मदद करती है। इसी विशेष व्यवस्था के कारण टॉय ट्रेन दुर्गम पहाड़ी रास्तों से गुजर पाती है।

अंग्रेजों के समय में शुरू हुआ था रेलमार्ग

नीलगिरि माउंटेन रेलवे का इतिहास 19वीं सदी से जुड़ा है। इस रेलमार्ग का प्रस्ताव 1854 में रखा गया था, लेकिन पहाड़ी इलाके की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण निर्माण कार्य में काफी समय लगा। निर्माण 1891 में शुरू हुआ और 1908 तक यह रेलमार्ग पूरी तरह चालू हो गया।

ब्रिटिश शासन के दौरान ऊटी गर्मियों में ठहरने के प्रमुख स्थानों में शामिल था। पहाड़ी क्षेत्र तक पहुंच आसान बनाने में इस रेलमार्ग की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

चाय के बागान, घाटियां और खूबसूरत पहाड़ हैं आकर्षण

मेट्टुपालयम से ऊटी तक के सफर में यात्रियों को हरियाली, पहाड़, चाय के बागान और गहरी घाटियां देखने को मिलती हैं। ट्रेन कुन्नूर, वेलिंगटन, अरुवंकाडु, केट्टी और लवडेल जैसे स्टेशनों से होकर गुजरती है।

धीमी गति के कारण यात्री खिड़की से बाहर के नजारों को आराम से देख सकते हैं और तस्वीरें भी खींच सकते हैं। प्रकृति के करीब समय बिताने और रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर सुकून पाने के लिए यह सफर खास माना जाता है।

यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल है नीलगिरि माउंटेन रेलवे

नीलगिरि माउंटेन रेलवे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल भारत की ऐतिहासिक पर्वतीय रेल प्रणालियों में से एक है। इसकी खास इंजीनियरिंग, ऐतिहासिक महत्व और प्राकृतिक सुंदरता इसे दूसरे रेलमार्गों से अलग बनाती है।

आज के आधुनिक दौर में जहां ट्रेन की तेज रफ्तार को प्राथमिकता दी जाती है, वहीं यह टॉय ट्रेन यात्रियों को धीमे और यादगार सफर का अनुभव देती है। यही वजह है कि इसकी कम रफ्तार भी इसकी लोकप्रियता कम नहीं कर पाई है।

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