सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड की चार सेंट्रल जेलों में ओपन बैरक शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने बताया है कि चार केंद्रीय कारागारों में ओपन बैरक के संचालन को कैबिनेट से प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत लागू की जा रही है।
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मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि ओपन जेल के संचालन, सुविधाओं और विस्तार से जुड़ी प्रगति की त्रैमासिक रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल की जाएगी। पहली रिपोर्ट 3 नवंबर तक पेश करने की बात कही गई है। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी।
हजारीबाग में 32 एकड़ जमीन चिह्नित
ओपन जेल के विस्तार के लिए हजारीबाग में 32 एकड़ सरकारी जमीन चिह्नित की गई है। इस जमीन पर ओपन जेल के विस्तार का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा जा चुका है। इसके अलावा महिला बंदियों के लिए भी ओपन जेल में विशेष व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
रांची, हजारीबाग और दुमका समेत चार जेलों में व्यवस्था
हाईकोर्ट ने पहले निर्देश दिया था कि जब तक स्थायी सेंट्रल ओपन जेल का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक रांची, हजारीबाग, दुमका समेत चार केंद्रीय जेलों में अस्थायी रूप से ओपन जेल की व्यवस्था की जाए। अब इन चार जेलों में ओपन बैरक के संचालन को कैबिनेट की अनुमति मिल गई है।
कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना उद्देश्य
ओपन जेल या ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट का उद्देश्य बंदियों को नियंत्रित वातावरण में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए उन्हें धीरे-धीरे समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और पुनर्वास के लिए तैयार करना है। इसके तहत जिम, स्वास्थ्य सुविधा, बेहतर भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान देने के निर्देश हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद झारखंड हाईकोर्ट इस मामले की निगरानी कर रहा है। सरकार को ओपन जेलों के संचालन, सुविधाओं और विस्तार की स्थिति पर नियमित रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।












