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आदेश जारीः श्रमिकों का पंजीकरण शुरू, 1.27 करोड़ को लाभ

By Tamishree Mukherjee

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सोशल संवाद / रांची : राज्य के लाखों श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से झारखंड श्रमाधान पोर्टल पर एक व्यापक श्रमिक पंजीकरण अभियान की शुरुआत हुई है। इसे लेकर श्रम, नियोजन एवं कौशल विकास विभाग द्वारा आदेश जारी किया गया है। अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य के अधिक से अधिक श्रमिकों को पोर्टल पर पंजीकृत कर उन्हें सरकार द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं का लाभपहुंचाना है, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित और सुनिश्चित हो सके। श्रम विभाग ने इस अभियान को लेकर पंजीकरण करें, योजनाओं का लाभप्राप्त करें, सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करें का नारा दिया है।

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पंजीकरण कराने वाले श्रमिकों को तीन श्रेणियों में बांटा गयाः अभियान के तहत श्रमिकों को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित कर पंजीकरण की सुविधा दी गई है। इनमें निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिक यानी राज्य में करीब 1.27 करोड़ श्रमिकों को सीधे तौर पर फायदा होगा। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, इस पंजीकरण अभियान से न केवल श्रमिकों को उनके अधिकारों की जानकारी मिलेगी, बल्कि वे सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ भी उठा सकेंगे। यह पोर्टल श्रमिकों के लिए एक ही मंच पर विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच सुनिश्चित करेगा। इससे श्रमिकों को बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

राज्य में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की संख्या 15 लाख तकः

पहली श्रेणी निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों यानी बीओसीडब्ल्यू (भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार) की है। इसमें भवन निर्माण, सड़क निर्माण तथा अन्य सन्निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और कल्याण योजनाओं के दायरे में लाया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा बीओसीडब्ल्यू श्रमिकों के हितार्थ कुल 14 कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें श्रमिक औजार सहायता, साइकिल सहायता, झारखंड निर्माण कर्मकार मृत्यु/दुर्घटना सहायता, मेधावी पुत्र/पुत्री छात्रवृत्ति, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, चिकित्सा सहायता, मातृत्व प्रसुविधा, अंत्येष्टि सहायता, विवाह सहायता, पेंशन, निःशक्तता पेंशन, परिवार पेंशन, अनाथ पेंशन तथा निर्माण श्रमिक सेफ्टी किट योजना प्रमुख हैं। एक अनुमान के मुताबिक, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (बीओसीडब्ल्यू) कल्याण बोर्ड के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की संख्या लगभग 12 लाख से 15 लाख के बीच आंकी गई है।

रोजगार की तलाश में राज्य से बाहर या विदेश में कार्यरत हैं 16 लाख श्रमिक

बीओसीडब्ल्यू (भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार), असंगठित क्षेत्र के श्रमिक और राज्य के बाहर एवं विदेशों में कार्यरत प्रवासी श्रमिक शामिल हैं। इन तीनों को मिलाकर तीसरी श्रेणी प्रवासी श्रमिकों के लिए है। ये ऐसे श्रमिक हैं जो रोजगार की तलाश में राज्य से बाहर या विदेश में कार्यरत हैं। राज्य के करीब 16 लाख से अधिक प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों या विदेशों में कार्यरत है। इस श्रेणी के तहत प्रवासी श्रमिकों के लिए दो तरह की योजनाएं चलाई जाती हैं। पहले वे श्रमिक हैं, जो विदेशों में कार्यरत हैं। इनके हितार्थ मुख्यमंत्री झारखंड
अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी श्रमिक अनुदान योजना प्रमुख रूप से चलाई जा रही है। इस श्रेणी के श्रमिकों को राज्य सरकार द्वारा आवश्यक सहायता एवं सुरक्षा दी जाती है, ताकि दुर्घटना, बीमारी या अन्य किसी आपात स्थिति में उन्हें त्वरित सहायता मिल सके और वे भी राज्य सरकार की योजनाओं से लाभान्वित हो सकें।

96 लाख असंगठित श्रमिकों को कल्याणकारी सहायता

दूसरी श्रेणी में असंगठित क्षेत्र के श्रमिक आते हैं। इसमें छोटे किसान, घरेलू कामगार, रेहड़ी-पटरी वाले तथा रिक्शा चालक जैसे कामगार शामिल किए गए है। इन श्रमिकों के लिए राज्य सरकार द्वारा असंगठित कर्मकार मृत्यु दुर्घटना सहायता, मातृत्व प्रसुविधा, अंत्येष्टि सहायता, कौशल उन्नयन, उपचार सहायता, श्रमिक औजार सहायता, साइकिल सहायता, सिलाई मशीन सहायता तथा विवाह सहायता योजनाएं चलाई जाती है। एक अनुमान और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की संख्या लगभग 94 लाख से 96 लाख के बीच है।

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