सत्य निकेतन में पीजी संचालकों को भाजपा विधायक अनिल शर्मा का संरक्षण- संजीव झा

By Tamishree Mukherjee

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सत्य निकेतन में पीजी संचालकों को भाजपा विधायक अनिल शर्मा का संरक्षण

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सोशल संवाद / नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी ने सत्य निकेतन इलाके में अवैध पीजी को लेकर बड़ा खुलासा किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने कहा कि स्थानीय लोग बता रहे हैं कि पीजी संचालकों को भाजपा विधायक अनिल शर्मा का संरक्षण प्राप्त है। 1986 के लैंड रिकॉर्ड के अनुसार, अनिल शर्मा के पिता को 307 वर्ग गज जमीन अलॉट की गई थी। ऐसे में रेखा गुप्ता सरकार को यह जांच करानी चाहिए कि अनिल शर्मा 500 वर्ग गज के पीजी और 500 वर्ग गज के मकान मालिक कैसे बन गए,? साथ ही, अगर अवैध पीजी पर बुलडोजर की कार्रवाई होती है तो सरकार को इसकी शुरूआत अनिल शर्मा के अवैध पीजी से करके दिल्ली में नजीर पेश करनी चाहिए।

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बुधवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर विधायक संजीव झा ने कहा कि सत्य निकेतन में चल रहे अवैध पीजी कारोबार को लेकर वहां की एक बच्ची का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें बताया गया है कि यह सब विधायक अनिल शर्मा के संरक्षण में चल रहा है। सीएम रेखा गुप्ता भी वहां गई थीं तो लोगों ने उन्हें भी ये जानकारी जरूर दी होगी। उन्होंने कहा कि 500 वर्ग गज में बने पीजी के बगल में विधायक अनिल शर्मा का घर भी 500 गज में पीजी है। जबकि 1986 के लैंड रिकॉर्ड के अनुसार, उनके पिताजी को 307 गज जमीन अलॉट की गई थी। 1986 में ही राज्यसभा में एक सवाल पूछा गया था कि 4 जून 1986 को गांव अराकपुर बाग मोची (नई दिल्ली) में गांव वासियों की उपस्थिति और सहयोग से क्या भूमि का कोई सर्वेक्षण किया गया था? और क्या इस सर्वेक्षण के अनुसार चूल्हा टैक्स देने वाले व्यक्तियों, उनके बेटों तथा पोतों के लिए अलग-अलग भूमि निर्धारित की गई थी?

संजीव झा ने कहा कि जब अनिल शर्मा के पिताजी 307 गज का चूल्हा टैक्स भर रहे थे, तो फिर अलग से इनका 500 गज का पीजी और 500 गज के मकान की जमीन कहां से आई? क्या 1986 के बाद कोई रजिस्ट्री हुई और उसके पेपर मौजूद हैं या उन्होंने अवैध कब्जा किया है? संजीव झा ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता इसकी जांच जरूर कराएंगी और अगर वो जमीन अवैध है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।

संजीव झा ने कहा कि अनिल शर्मा दो बार पार्षद और डिप्टी मेयर रहे हैं। जब वो पार्षद थे, उसी समय लोकायुक्त में यह शिकायत की गई थी कि अवैध जगहों पर ये पीजी चल रहे हैं और इन पर कार्रवाई की जाए। लेकिन अनिल शर्मा के डिप्टी मेयर रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई। अगर तब कार्रवाई की गई होती, तो आज इतने पीजी नहीं बनते और इस तरह का हादसा नहीं होता। शुरुआत अनिल शर्मा ने की, इसलिए बाकी सब भी बन गए।

संजीव झा ने आम आदमी पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से चार सवाल पूछे और जवाब की उम्मीद जताई। पहला, जो पीजी बना है, उसमें 100 फीसद कवरेज कर लिया गया है। कम से कम 25 फीसद जगह यूटिलिटी के लिए छोड़ी जानी चाहिए। अगर 100 फीसद कवर्ड है तो नक्शा पास ही नहीं हो सकता। रेखा गुप्ता ने चौथी और पांचवीं मंजिल को सील करने की बात कही है, तो सीलिंग की शुरुआत यहीं से होनी चाहिए ताकि एक उदाहरण सेट हो सके।

संजीव झा ने आगे कहा कि अगर यह पांच मंजिला इमारत है और 100 फीसद एरिया कवर किया गया है, तो यह पूरी तरह अवैध है। ऐसे में बुलडोजर यहीं से चलना चाहिए ताकि बाकी लोगों को एक कड़ा संदेश मिले। दूसरा, 307 गज के अलावा जो बाकी जमीन है, क्या उसकी कोई रजिस्ट्री है या वह अवैध कब्जा है? इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। तीसरा, लोकायुक्त में शिकायत के बाद जब कार्रवाई के लिए कहा गया था, तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई? चौथा, अनिल शर्मा के ऐसे कितने अवैध पीजी चल रहे हैं, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता इसकी भी जांच कराएं ताकि एक नजीर पेश हो सके।

संजीव झा ने कहा कि बार-बार केवल घटना होने पर ही कहा जाता है कि कठोर आदेश दिए जाएंगे और कार्रवाई होगी। साकेत की घटना में भी यही सारी बातें कही गई थीं कि बिल्डिंग का सेफ्टी ऑडिट और इंस्पेक्शन होगा। अगर उस समय सेफ्टी ऑडिट और बिल्डिंग इंस्पेक्शन हो गया होता, तो आज इन बच्चों की जान नहीं जाती। केवल बातों से काम नहीं चलेगा, बिना किसी पक्षपात के निष्पक्ष कार्रवाई करनी होगी। अगर उनके अपने विधायक इस अवैध कारोबार में शामिल हैं, तो उन पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं, कोंडली के विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि यह साफ हो गया है कि कैसे दिल्ली में डीडीए की जमीन पर कब्जा करके अवैध इमारत खड़ी की गई और उस अवैध इमारत से महीने के लाखों रुपए वसूलने का काम किया जा रहा है। इसलिए हमारी सरकार से स्पष्ट मांग है कि सरकारी जमीन पर बनी उस अवैध बिल्डिंग और जिन अधिकारियों के संरक्षण में वह बनी है, उन पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही, जो व्यक्ति उस बिल्डिंग को चला रहा है, जो उसका मालिक है और विधायक है, सरकार उससे उतने सालों का पूरा किराया भी वसूले।

कुलदीप कुमार ने कहा कि दिल्ली में कोई गरीब आदमी अपना पेट काटकर या रिटायरमेंट के बाद 20-22 गज का या एक-दो मंजिला मकान बनाता है, तो उसे तोड़ने के लिए एमसीडी और डीडीए तुरंत पहुंच जाती है। गरीब की झुग्गी को अवैध बताकर तोड़ने पहुंच जाते हैं। लेकिन अगर वही व्यक्ति भाजपा का नेता है और छह मंजिला बिल्डिंग बनाकर 10-20 लाख रुपए किराया वसूल रहा है, तो वह वैध हो जाता है। इसका मतलब है कि अवैध और वैध के नियम भी अमीरी और गरीबी देखकर तय किए जा रहे हैं।

कुलदीप कुमार ने कहा कि जिस बिल्डिंग का जिक्र किया गया है, उसके बारे में यह भी जानकारी मिली है कि वहां पीजी का कमरा भी जाति और धर्म देखकर दिया जाता है। पैसे लेने में भी ये लोग जाति और धर्म देखते हैं। सत्य निकेतन में इस तरह का पूरा नेक्सस चल रहा है। यह सरकार और मुख्यमंत्री उन आठ बच्चों के परिवारों को क्या जवाब देंगी जिनका रेस्क्यू करने में सरकार को 32 घंटे लग गए? जो सरकार पूरे देश में घूम-घूमकर सब कुछ ढूंढ लेती है, वह उन बच्चों को नहीं ढूंढ पाई, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

कुलदीप कुमार ने कहा कि जो कागजात दिखाए गए हैं, वे सरकारी रिकॉर्ड हैं। यह पता लगना चाहिए कि 300 गज का मालिक 1000 गज का मालिक कैसे बन गया? यह बिल्कुल सही सवाल है कि 100 फीसद कवरेज लेने के लिए एमसीडी का कौन सा लाइसेंस लेना पड़ता है और कौन सा नक्शा पास करना पड़ता है, यह हमें भी पता लगना चाहिए।

कुलदीप कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो बड़ी-बड़ी बातें की हैं, उनसे अब दिल्ली में डर का माहौल है। अब हर आदमी को पता है कि एमसीडी वाले उनके घर, ऑफिस या दुकान पर आकर बिल्डिंग नहीं तोड़ेंगे, बल्कि सीधे पैसे मांगेंगे। पैसे न देने पर सील कर देंगे और फिर कुछ दिन बाद पैसे लेकर उस सील को डीसील कर देंगे। दिल्ली में जो बिल्डर माफिया पैसा दे देगा, उसका मकान बच जाएगा और जो गरीब आदमी पैसे नहीं दे पाएगा, उसका मकान टूट जाएगा।

कुलदीप कुमार ने कहा कि दिल्ली और देश में भाजपा की यही नीति रही है। वह हमेशा से लोगों को लूटने का काम करती है। एमसीडी में पिछले 20 सालों में इन लोगों ने जो करप्शन किया है और जिस तरह दिल्ली को बर्बाद किया है, वह आज पूरी दिल्ली देख रही है।

वहीं, पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि जब से सत्य निकेतन में पीजी की बिल्डिंग गिरी है, वहां के सारे लोग एक ही नाम ले रहे हैं कि भाजपा के स्थानीय विधायक अनिल शर्मा बाकायदा पीजी का एक पूरा रैकेट चलाते हैं। आसपास के पीजी को भी उनका संरक्षण प्राप्त है और एमसीडी व सरकारी विभागों से उन्हें क्लीन चिट दिलवाना अनिल शर्मा का काम है। यह हम नहीं कह रहे हैं। ये सारे आरोप वहां के स्थानीय लोग लगा रहे हैं। उन्होंने एक तस्वीर दिखाते हुए कहा कि सत्य निकेतन में विधायक अनिल शर्मा का भी एक पांच से छह मंजिला पीजी है। सरकारी आदेश है कि पांच मंजिल वाली अवैध इमारतों को गिराया जाएगा। रेखा गुप्ता सरकार बताए कि लगभग 800 से 1000 गज की जगह में बनी बिल्डिंग अनिल शर्मा की है। इस बिल्डिंग में 100 फीसद कवरेज है, यानी जितनी जमीन है उस पूरी जमीन पर बिल्डिंग बनी हुई है।

अनुराग ढांडा ने पूछा कि क्या एमसीडी 100 फीसद कवरेज की अनुमति देती है और क्या इसके लिए नक्शा पास हो सकता है? अनिल शर्मा के पीजी का नक्शा अगर एमसीडी से पास हुआ है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए कि 100 फीसद कवरेज का नक्शा किस तरह पास हुआ, कितनी मंजिल पास हुईं और कितनी बनी हुई हैं? इलाके में अवैध पीजी का पूरा रैकेट चल रहा है जिसका नेतृत्व अनिल शर्मा और उनकी टीम कर रही है। अब जब कई सारे पीजी गिराए जा रहे हैं, तो लोग पूछ रहे हैं कि क्या अनिल शर्मा कंपटीशन खत्म कराकर अपने पीजी के बेड के रेट बढ़ाने के लिए यह पूरा ड्रामा कर रहे हैं?

अनुराग ढांडा ने कहा कि क्या अनिल शर्मा की निशानदेही पर उनके प्रतिद्वंद्वियों की बिल्डिंग गिराई जा रही है? वो बिल्डिंग जितनी अवैध हैं, उससे कहीं ज्यादा अवैध तो अनिल शर्मा की यह बिल्डिंग है। यह बिल्डिंग खस्ताहाल है, प्लास्टर बाहर से झड़ रहा है, 100 फीसद कवरेज है और पांच-छह मंजिलें बनी हुई हैं। अगर उस इलाके में किसी बिल्डिंग पर बुलडोजर चलना चाहिए, तो पहली बिल्डिंग विधायक अनिल शर्मा की होनी चाहिए।

अनुराग ढांडा ने लैंड रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि पहले एक चूल्हा टैक्स भरा जाता था। राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में जो रिकॉर्ड निकलकर आया, उसके अनुसार अनिल शर्मा के पिताजी के नाम पर 307 गज जमीन है जिसका वे टैक्स भरते थे। लेकिन यह बिल्डिंग 800 से 1000 गज में बनी हुई है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि 307 गज के अलावा जो बाकी जमीन इस बिल्डिंग को बनाने में इस्तेमाल हुई है, वह अनिल शर्मा ने कब और किससे खरीदी? अगर जमीन नहीं खरीदी गई है, तो क्या सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके यह बिल्डिंग बनाई गई है?

अनुराग ढांडा ने आगे कहा कि यह सारे सवाल हमारे नहीं हैं, बल्कि वहां के स्थानीय यह चर्चा कर रहे हैं। अगर इन सवालों का जवाब नहीं मिलता है, तो इसका स्पष्ट कारण है कि वहां पूरा पीजी नेक्सस चलाया जा रहा है जिसके सरगना विधायक अनिल शर्मा हैं। स्थानीय लोगों ने अंदेशा जताया है कि सरकार अभी जो कार्रवाई कर रही है, वह अनिल शर्मा के इस रैकेट को और ज्यादा मजबूत करने के लिए की जा रही है।

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