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हेमंत सोरेन के बयान पर सियासी घमासान, भाजपा ने लगाया धार्मिक अपमान का गंभीर आरोप

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर माहौल गर्म हो गया है। विधानसभा में दिए गए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बयान पर अब भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं और इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील मामला बताया है।

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आदित्य साहू ने प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सदन में हिंदू देवी-देवताओं और पर्व-त्योहारों को लेकर की गई टिप्पणी बेहद आपत्तिजनक है। उनके मुताबिक, भारत एक ऐसी भूमि है जहां सदियों से सनातन परंपराएं, पूजा-पद्धतियां और धार्मिक मान्यताएं समाज की नींव रही हैं। ऐसे में किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह की टिप्पणी करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि जनता की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला भी है।

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि इतिहास गवाह रहा है कि अनेक बार सनातन संस्कृति पर हमले हुए, लेकिन इसकी जड़ें इतनी मजबूत हैं कि इसे समाप्त नहीं किया जा सका। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के बाद से ही कुछ राजनीतिक दलों ने तुष्टिकरण की राजनीति के तहत धार्मिक मुद्दों को निशाना बनाया है और अब वही प्रवृत्ति झारखंड में भी देखने को मिल रही है।

आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रास्ते पर चल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी कुछ राजनीतिक बयानों में धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं को लेकर विवाद खड़े किए गए हैं और अब उसी तरह की भाषा झारखंड में भी इस्तेमाल हो रही है।

इस पूरे मामले में भाजपा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी अन्य धर्म या समुदाय के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी की जा सकती है। साहू ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर हिम्मत है तो अन्य धर्मों की मान्यताओं पर भी इसी तरह टिप्पणी करके दिखाएं। उनका कहना है कि सरकार का यह रवैया एकतरफा और पक्षपातपूर्ण नजर आता है।

इधर, भाजपा के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत कई वरिष्ठ नेता विधानसभा में इस विषय को प्रमुखता से उठाते नजर आए। उनका कहना है कि सत्ता में बैठे लोगों को अपने शब्दों की जिम्मेदारी समझनी चाहिए और किसी भी धर्म या आस्था का मजाक उड़ाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

हालांकि, दूसरी ओर सत्तारूढ़ दल और उसके समर्थकों ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यह मुद्दा अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है और राज्य सरकार लगातार विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उनके अनुसार, विपक्ष इस तरह के विवाद उठाकर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।

फिलहाल, यह विवाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुद्दा और कितना तूल पकड़ता है और इसका राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

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