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मणिपुर में लागू हुआ राष्ट्रपति शासन, केंद्र के हाथ में आई कमान

February 14, 2025 1:31 PM
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सोशल संवाद / डेस्क : मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के चार दिनों के बाद 13 फरवरी को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है । गृह मंत्रालय की ओर से इसके बारे में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। आपको बता दे कि बीते लंबे समय से देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित राज्य मणिपुर में  हिंसा जारी है। मणिपुर विधानसभा को भी “निलंबित” कर दिया गया है।

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ज्ञात हो कि मणिपुर में मई 2023 से ही मैतेई (Meitei) और कुकी-जो (Kuki-Zo) समुदायों के बीच जातीय संघर्ष जारी है, जिसमें अब तक 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक अधिसूचना जारी कर बताया कि “चूंकि मैं, द्रौपदी मुर्मू भारत की राष्ट्रपति, मणिपुर राज्य के राज्यपाल से एक रिपोर्ट प्राप्त कर चुकी हूं और रिपोर्ट व मुझे मिली अन्य सूचनाओं पर विचार करने के बाद मैं संतुष्ट हूं कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें उस राज्य की सरकार भारत के संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चल सकती है। अब, इसलिए संविधान के अनुच्छेद 356 द्वारा मिली शक्तियों और उस संबंध में मुझे सक्षम बनाने वाली सभी अन्य शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मैं घोषणा करती हूं कि मैं भारत के राष्ट्रपति के रूप में मणिपुर राज्य सरकार के सभी कार्यों और उस राज्य के राज्यपाल में निहित या उनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सभी शक्तियों को अपने पास लेती हूं।’

अधिसूचना के अनुसार, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति ने मणिपुर सरकार के सभी कार्य अपने अधीन ले लिए हैं। इसके तहत—

  • मणिपुर सरकार के सभी कार्य और राज्यपाल को प्राप्त शक्तियां राष्ट्रपति को हस्तांतरित हो गई हैं।
  • मणिपुर की विधानसभा की शक्तियां संसद द्वारा या उसके अधिकार क्षेत्र में काम करने वाली किसी संस्था द्वारा प्रयोग की जाएंगी।

मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने 10 फरवरी से शुरू होने वाले मणिपुर विधानसभा के सत्र को अमान्य घोषित कर दिया था। बता दें कि इससे पहले मणिपुर विधानसभा का अंतिम सत्र 12 अगस्त, 2024 को संपन्न हुआ था। जानकारों ने संभावना जताई थी कि संवैधानिक गतिरोध पैदा होने के कारण राज्य में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन ही एकमात्र विकल्प है।

साथ ही आपको यह भी बता दे कि राष्ट्रपति शासन एक बार में छह महीने तक चल सकता है। इसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन हर छह महीने में संसदीय मंजूरी और एक साल के बाद कुछ खास शर्तों के साथ में ऐसा हो सकता है।

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