सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड में MMDR (खनिज एवं खनन विकास) कानून को लेकर सियासत गरमा गई है। झामुमो जहां इस कानून के विरोध में आंदोलन की तैयारी कर रहा है, वहीं भाजपा ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने हेमंत सोरेन सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए।
रघुवर दास ने कहा कि केंद्र सरकार का MMDR कानून राज्य और देश के हित में है। उनके मुताबिक, झामुमो इस कानून को गलत तरीके से पेश कर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि धनबाद, बोकारो, चतरा, हजारीबाग और रामगढ़ समेत कई जिलों में बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन और लूट हो रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव के दौरान जल, जंगल और जमीन की बात करने वाली सरकार सत्ता में आने के बाद इन्हीं संसाधनों को कथित तौर पर एक सिंडिकेट के हवाले कर चुकी है। उन्होंने इसी को लेकर झारखंड को ‘लूटखंड’ तक कह दिया।
रघुवर दास ने झामुमो के नेताओं और मंत्रियों पर भ्रष्टाचार तथा अवैध खनन से जुड़े आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं को इन मामलों में जेल तक जाना पड़ा, जो राज्य में भ्रष्टाचार की स्थिति को दर्शाता है।
निवेश और खनन को लेकर भी सरकार पर निशाना
निवेश के मुद्दे पर भी रघुवर दास ने हेमंत सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने देश-विदेश में निवेश लाने के दावे किए, लेकिन जमीन पर इसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं देता। उनका आरोप है कि भ्रष्टाचार और अवैध खनन की वजह से निवेशक झारखंड में निवेश करने से पीछे हट रहे हैं।
उन्होंने कहा कि खनन से मिलने वाली रॉयल्टी का बड़ा हिस्सा राज्य सरकार को मिलता है। इसके बावजूद राज्य सरकार केंद्र पर आरोप लगा रही है। रघुवर दास ने दावा किया कि राज्य में स्वीकृत 34 कोल ब्लॉकों में से केवल चार ही शुरू हो पाए हैं। उन्होंने लौह अयस्क और बॉक्साइट ब्लॉकों के संचालन को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।
DMF फंड के इस्तेमाल पर भी सवाल
रघुवर दास ने डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) फंड में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने धनबाद, चाईबासा और चतरा जैसे खनन प्रभावित जिलों में फंड के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोगों को अब भी शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नीतियों और बढ़ते सेस के कारण कोयला और लौह अयस्क की कीमतें ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक हो रही हैं। इसका असर उद्योगों पर पड़ रहा है और झारखंड की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर हो रही है।
अंत में रघुवर दास ने हेमंत सरकार से सवाल किया कि पिछले छह वर्षों में कितने आदिवासी और मूलवासी परिवारों की आर्थिक स्थिति में वास्तविक सुधार हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का फायदा आम जनता की बजाय सत्ता से जुड़े लोगों और नौकरशाहों को अधिक मिल रहा है। उन्होंने कहा कि MMDR कानून को लेकर राज्य सरकार जनता को गुमराह कर रही है और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।









