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‘छात्रों की गूंज’ महारैली में बोले राहुल गांधी- वसूली तंत्र बन गई है भारत की शिक्षा व्यवस्था

By Riya Kumari

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‘छात्रों की गूंज’ महारैली में बोले राहुल गांधी- वसूली तंत्र बन गई है भारत की शिक्षा व्यवस्था

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सोशल संवाद / डेस्क : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ एक वसूली तंत्र बन गई है। उन्होंने कहा कि देशभर के परिवार जितना पैसा सिर्फ नीट परीक्षा की तैयारी पर खर्च करते हैं, वो भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट के बराबर है। उन्होंने बेरोजगारी पर चिंता जताते हुए मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का आह्वान किया और छात्रों से इस बदलाव के आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

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बुधवार को राजस्थान के कोटा में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ महारैली में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों के बीच राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि हमें ऐसी शिक्षा व्यवस्था लानी होगी जो युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने दे। उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी यह है कि युवाओं का सपना बिना लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए, सबसे कम कीमत पर पूरा हो।

करीब एक घंटे तक छात्रों और उनके परिजनों के साथ चले संवाद में राहुल गांधी ने बताया कि हर वर्ष देश में लगभग 22 लाख छात्र नीट की परीक्षा देते हैं और उनके परिवार इस पर करीब 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं। वहीं, इतना ही पैसा सरकार देश के शिक्षा बजट में डालती है, जो 1.40 लाख करोड़ रुपये हैं। उन्होंने बताया कि नीट, एसएससी, आरआरबी, यूपीएससी और जेईई के लिए छात्रों द्वारा खर्च की जाने वाली कुल रकम लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये बैठती है। यह राशि भारत सरकार के पांच बड़े मंत्रालयों- शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के कुल बजट के बराबर है।

देश की शिक्षा व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि प्रतिशत आंकड़ों के अनुसार यहां मौजूद तीन हजार छात्रों में से सिर्फ एक आईएएस बनेगा। सिर्फ 30 आईआईटी में जाएंगे और सिर्फ 180 डॉक्टर बनेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था वसूली करने वाली मशीन बन गई है। यह सिर्फ शिक्षा देने का सिस्टम नहीं है, बल्कि परीक्षा के नाम पर युवाओं से लाखों-करोड़ रुपये छीनने का सिस्टम है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है और उसकी जगह प्राइवेट सेक्टर का कब्जा हो गया है। आज स्कूलों की फीस आसमान छू रही है और इतनी भारी फीस देने के बाद भी बच्चों को ट्यूशन का सहारा लेना पड़ता है। इसके बाद महंगे प्राइवेट कॉलेज और फिर कोचिंग सेंटरों का भारी-भरकम खर्च उठाना पड़ता है। लेकिन इस सब के बावजूद नौकरी की कोई गारंटी नहीं है।

बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता व्यक्त करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था रोजगार देने वाली नहीं रही है। आज के समय में भारत में 1000 बच्चों में से केवल 12 को ही वेतन वाली नौकरी मिल रही है। करीब 300 युवा बेरोजगार रहेंगे, फिर वे नशे और कर्ज की तरफ बढ़ जाएंगे। करीब 700 लोग गिग वर्कर या कुली बनेंगे, मनरेगा से जुड़ेंगे या फिर असंगठित क्षेत्र में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि छात्र और उनके परिवार पढ़ाई पर अपनी पूरी जमा-पूंजी लगा देते हैं, लेकिन रोजगार नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि यदि कोई युवा इंजीनियरिंग, मेडिकल, आईएएस/आईपीएस, वकालत या रक्षा सेवाओं जैसे पारंपरिक क्षेत्रों से हटकर कुछ अलग करना चाहता है, तो यह व्यवस्था उसकी महत्वाकांक्षाओं का साथ नहीं देती।

अपने संबोधन के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने भावुक होते हुए नीट अभ्यर्थी आकांक्षा की आत्महत्या का जिक्र किया, जिसने पेपर लीक होने के बाद तंग आकर अपनी जान दे दी थी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था बच्चों को आगे बढ़ाने के बजाय कई बार उन्हें दबाने का काम करती है, जो देश के भविष्य के लिए चिंताजनक है। राहुल गांधी ने छात्रों की आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकने के लिए शिक्षा प्रणाली में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था बच्चों के सपने पूरे नहीं कर रही, बल्कि उन्हें विकल्प भी नहीं दे रही है।

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