सोशल संवाद / डेस्क : रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या का भव्य राम मंदिर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राम मंदिर में सेवा देने वाले पुजारियों को कितनी सैलरी मिलती है और उनका चयन कैसे किया जाता है? श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट समय-समय पर पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों के वेतन तथा सुविधाओं की समीक्षा करता है।
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राम मंदिर के मुख्य पुजारी को कितनी मिलती है सैलरी?
राम मंदिर के मुख्य पुजारी को लगभग 38,500 रुपये प्रति माह वेतन दिया जाता है। वहीं सहायक पुजारियों को उनकी जिम्मेदारियों और अनुभव के आधार पर 33,000 रुपये से 36,300 रुपये प्रति माह तक वेतन मिलता है। इसके अलावा मंदिर के प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों, जैसे कोठारी और भंडारी, को हर महीने 19,000 रुपये से 24,000 रुपये तक वेतन दिया जाता है।
पुजारियों को मिलती हैं ये विशेष सुविधाएं
मासिक वेतन के अलावा राम मंदिर के पुजारियों को कई अतिरिक्त सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। इनमें शामिल हैं:
- मुफ्त आवास
- भोजन की व्यवस्था
- चिकित्सा सुविधाएं
- अवकाश (छुट्टी) का प्रावधान
ये सुविधाएं सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं के समान मानी जाती हैं, ताकि पुजारी पूरी तरह धार्मिक कार्यों और मंदिर सेवा में अपना ध्यान केंद्रित कर सकें।
प्रशिक्षण के दौरान मिलता है वजीफा
राम मंदिर में पुजारी बनने के इच्छुक उम्मीदवारों को सीधे स्थायी नियुक्ति नहीं दी जाती। चयनित अभ्यर्थियों को पहले 6 महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इस दौरान प्रशिक्षुओं को हर महीने 2,000 रुपये का वजीफा मिलता है। साथ ही ट्रस्ट द्वारा मुफ्त भोजन और आवास की व्यवस्था भी की जाती है।
राम मंदिर का पुजारी बनने के लिए क्या है योग्यता?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पुजारियों की भर्ती के लिए कुछ विशेष पात्रता मानदंड तय किए हैं।
उम्मीदवार के लिए जरूरी है कि:
- उसने किसी मान्यता प्राप्त गुरुकुल या वैदिक संस्थान से शिक्षा प्राप्त की हो।
- वेद, उपनिषद, कर्मकांड और धार्मिक परंपराओं का गहरा ज्ञान हो।
- आवेदन के समय उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच हो।
- रामानंदी संप्रदाय में दीक्षित हो।
- वैष्णव परंपराओं का पालन करता हो।
कैसे होता है पुजारियों का चयन?
पुजारियों की भर्ती प्रक्रिया तब शुरू होती है जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट आधिकारिक विज्ञापन जारी करता है।
पहला चरण: आवेदन की जांच
सबसे पहले उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता, धार्मिक प्रशिक्षण और अन्य पात्रताओं की जांच की जाती है। इसके बाद योग्य उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जाता है।
दूसरा चरण: साक्षात्कार और परीक्षा
शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों का मूल्यांकन देश के प्रतिष्ठित संतों, वैदिक विद्वानों और आचार्यों के पैनल द्वारा किया जाता है।
इस दौरान उम्मीदवारों के:
- वेद और उपनिषदों का ज्ञान
- संस्कृत उच्चारण की शुद्धता
- धार्मिक अनुष्ठानों की समझ
- मंदिर पूजा-पद्धति की जानकारी
का परीक्षण किया जाता है।
तीसरा चरण: विशेष प्रशिक्षण
साक्षात्कार में सफल उम्मीदवारों को छह महीने के गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किया जाता है। इस दौरान उन्हें रामलला की पूजा-विधि, संध्या वंदन, मंदिर अनुष्ठान और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद ही उम्मीदवारों को सहायक पुजारी के रूप में नियुक्त किया जाता है।









