सोशल संवाद / रांची : झारखंड देश का संभवतः ऐसा राज्य है, जहां 25 लाख से अधिक जीएसटी टर्नओवर और 6 लाख से अधिक आयकर भरने वाले लोग भी राशन कार्ड बनाए हुए हैं। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने ऐसे अपात्र लाभुकों की पहचान कर बड़े पैमाने पर राशन कार्ड रद्द करने की कार्रवाई की है।
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पिछले छह से सात माह में विभाग ने कुल आठ श्रेणियों में करीब 10.06 लाख अपात्र लाभुकों के राशन कार्ड रद्द किए है। इसमें 25 लाख रुपये से अधिक जीएसटी टर्नओवर भरने वाले 80.43% और 6 लाख से अधिक आयकर रिटर्न वाले 63% लाभुक शामिल हैं। ये सभी लाभुक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) से आच्छादित राज्य के अलग-अलग जिलों से संबंधित हैं। विभागीय जांच की प्रक्रिया अभी जारी है। फिलहाल उपरोक्त सभी श्रेणियों में 22 लाख से अधिक कार्डधारकों की योग्यता की जांच की जा रही है।
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल कार्डधारकों पर कार्रवाईः
राज्य के 4,704 कार्डधारक ऐसे हैं, जो किसी न किसी कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हैं। ऐसे लोगों की सूची केंद्रीय कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय (एमसीए) ने राज्य सरकार को उपलब्ध कराई है। जिसके बाद सभी का कार्ड रद्द किया गया है। सबसे अधिक धनबाद (776), पू.सिंहभूम (729), पलामू (557) और गिरिडीह (341) के लाभुकों का नाम काटा गया है। 96% का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी, 95.70% ने छह माह से नहीं किया राशन उठावः संदिग्ध आधार वैसे हैं,
एक से अधिक कार्डधारकों पर भी कार्रवाई
लैंड होल्डिंग धारकों के राशन कार्ड रद्द होने का अर्थ है कि विभागीय जांच के दौरान जमीन की सीमा से अधिक संपत्ति रखने वाले लोगों को अयोग्य माना गया। बता दें कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन कार्ड केवल गरीब, भूमिहीन या आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए है।
इसमें शुरुआत के चार जिलों में चतरा के 16,072, गढ़वा के 13,092, पलामू के 12,603 और गिरिडीह के 9875 कार्ड रद्द किए गए है। डुप्लीकेट लाभुक के राशन कार्ड रद्द का अर्थ यह है कि किसी लाभार्थी का नाम या आधार नंबर एक से अधिक राशन कार्डों (अन्य राज्यों में भी) में दर्ज पाया गया है। इस श्रेणी में सबसे अधिक पूर्वी सिंहभूम (18,050), पाकुड़ (6,321), सरायकेला-खरसावां (6,181) और धनबाद (5,088) के कार्ड रद्द किए गए है।










