सोशल संवाद / डेस्क : भारत का सबसे लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI (Unified Payments Interface) भविष्य में पूरी तरह मुफ्त नहीं रह सकता। केंद्र सरकार ने संसद में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है, जिससे भविष्य में कुछ UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का कानूनी रास्ता खुल सकता है।
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हालांकि, फिलहाल UPI पर कोई नया शुल्क लागू नहीं किया गया है। सरकार ने केवल ऐसा कानूनी ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव रखा है, जिसके आधार पर भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर MDR लागू किया जा सके।
क्या अभी UPI पर चार्ज देना होगा?
नहीं।
अभी तक सरकार ने किसी भी UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने का फैसला नहीं किया है। प्रस्तावित संशोधन केवल भविष्य में MDR लागू करने की कानूनी अनुमति देने के लिए है।
किन ट्रांजैक्शन पर लग सकता है MDR?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अधिकारियों के बीच कई विकल्पों पर चर्चा चल रही है। इनमें एक प्रस्ताव यह भी है कि—
- 2,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन
- 0.3% से 0.5% तक MDR
- यह शुल्क मुख्य रूप से बड़े व्यापारियों पर लागू हो सकता है।
हालांकि, इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
छोटे व्यापारियों और ग्राहकों पर क्या असर होगा?
प्रस्ताव के अनुसार, जिन व्यापारियों का वार्षिक कारोबार 1.5 करोड़ रुपये से कम है, उन्हें MDR से छूट मिल सकती है।
यदि ऐसा होता है तो—
- छोटे दुकानदारों के लिए UPI पहले की तरह मुफ्त रह सकता है।
- आम ग्राहकों को सीधे कोई अतिरिक्त शुल्क देने की संभावना कम मानी जा रही है।
- MDR का बोझ मुख्य रूप से बड़े कारोबारियों पर पड़ सकता है।
MDR क्या होता है?
Merchant Discount Rate (MDR) वह शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देते हैं।
वर्तमान व्यवस्था में—
- क्रेडिट कार्ड भुगतान पर व्यापारी लगभग 1.5% तक MDR देते हैं।
- डेबिट कार्ड पर यह शुल्क अपेक्षाकृत कम होता है।
- UPI ट्रांजैक्शन फिलहाल MDR से पूरी तरह मुक्त हैं।
इसी वजह से UPI देश में सबसे लोकप्रिय डिजिटल भुगतान माध्यम बन चुका है।
उद्योग MDR की मांग क्यों कर रहा है?
पेमेंट इंडस्ट्री का कहना है कि UPI पर कोई मर्चेंट शुल्क न होने के कारण कंपनियों के लिए एक टिकाऊ बिजनेस मॉडल तैयार करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
उनका तर्क है कि यदि सीमित MDR लागू होता है, तो—
- पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाया जा सकेगा।
- नई तकनीकों में निवेश बढ़ेगा।
- डिजिटल भुगतान सेवाओं का विस्तार आसान होगा।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
सरकार फिलहाल ऐसा संतुलित मॉडल तैयार करने पर विचार कर रही है जिसमें—
- छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
- बड़े कारोबारियों से सीमित MDR लिया जा सके।
- डिजिटल भुगतान व्यवस्था मजबूत बनी रहे।
अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है और प्रस्ताव पर चर्चा जारी है।









