सोशल संवाद / रांची: झारखंड में उच्च शिक्षा विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। राज्य में करीब 700 व्याख्याताओं (लेक्चरर्स) की बहाली को लेकर विवाद गहरा गया है। आरोप है कि संबंधित भर्ती प्रक्रिया का अंतिम परिणाम सार्वजनिक किए बिना ही अभ्यर्थियों की बहाली कर दी गई, जिससे पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। इस मामले को लेकर अभ्यर्थियों में भी नाराजगी देखी जा रही है।
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परिणाम जारी नहीं, फिर कैसे हुई नियुक्ति?
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया का अंतिम परिणाम अब तक आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद लगभग 700 व्याख्याताओं की बहाली होने से चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई अभ्यर्थियों ने मांग की है कि विभाग पूरी चयन प्रक्रिया और मेरिट सूची सार्वजनिक करे, ताकि किसी तरह की शंका न रहे।
पारदर्शिता की मांग तेज
उम्मीदवारों का कहना है कि किसी भी सरकारी भर्ती में पहले अंतिम परिणाम जारी किया जाना चाहिए और उसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। उनका आरोप है कि इस मामले में स्थापित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। ऐसे में चयन सूची, मेरिट और नियुक्ति से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
सरकार और विभाग से जवाब की मांग
मामले के सामने आने के बाद अभ्यर्थी और विभिन्न संगठनों ने उच्च शिक्षा विभाग से स्पष्ट जवाब मांगा है। उनका कहना है कि यदि नियुक्तियां नियमों के तहत हुई हैं तो विभाग को पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करनी चाहिए। वहीं, यदि कहीं अनियमितता हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
युवाओं में बढ़ी चिंता
झारखंड में भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर पहले भी कई बार पारदर्शिता और समयबद्धता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में यह मामला भी युवाओं और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकारी नौकरियों में निष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रक्रिया ही युवाओं का विश्वास बनाए रख सकती है।









