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जापान की अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा जारी कथित 3I/ATLAS की तस्वीर से खगोल जगत में हलचल

By Muskan Thakur

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जापान की अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा जारी

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सोशल संवाद/डेस्क : हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक रहस्यमयी तस्वीर ने दुनियाभर के खगोलशास्त्रियों और अंतरिक्ष प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दावा किया जा रहा है कि जापान की स्पेस एजेंसी ने इंटरस्टेलर कॉमेट 3I/ATLAS (थ्री आई एटलस) की एक वास्तविक तस्वीर जारी की है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस संभावित इमेज ने वैज्ञानिक समुदाय में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

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यह तस्वीर कथित रूप से स्पेक्ट्रल और इमेजिंग डेटा के आधार पर तैयार की गई है। माना जा रहा है कि यह अब तक का सबसे स्पष्ट और यथार्थवादी चित्र है, जो इस रहस्यमय अंतरतारकीय धूमकेतु की झलक दिखाता है।

3I/ATLAS क्या है?

3I/ATLAS को 1 जुलाई 2025 को नासा के Asteroid Terrestrial-impact Last Alert System (ATLAS) टेलिस्कोप द्वारा चिली के रियो हर्टाडो ऑब्जर्वेटरी से खोजा गया था। नासा के Center for Near Earth Object Studies (CNEOS) के अनुसार, इसकी कक्षा सूर्य की गुरुत्वाकर्षण सीमा से बहुत बाहर जाती है, जिससे यह पुष्टि होती है कि यह हमारे सौरमंडल से बाहर का ऑब्जेक्ट है।

यह अब तक खोजा गया तीसरा इंटरस्टेलर विज़िटर है — 1I/‘Oumuamua (2017) और 2I/Borisov (2019) के बाद। इसके नाम में “I” का अर्थ “Interstellar” और “3” का अर्थ इसकी खोज क्रम संख्या से है।

मूल और यात्रा

वैज्ञानिकों के अनुसार, 3I/ATLAS की कक्षा हाइपरबोलिक (Hyperbolic) है, यानी यह सूर्य की परिक्रमा नहीं करता और एक बार गुजरने के बाद हमेशा के लिए अंतरिक्ष में खो जाएगा। यह तथ्य इसके इंटरस्टेलर (अंतरतारकीय) होने का स्पष्ट प्रमाण देता है।

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने ऐसे ऑब्जेक्ट्स को “कॉस्मिक आउटसाइडर्स” बताया है — यानी ये वे खगोलीय पिंड हैं जो अन्य सितारा तंत्रों से निकलकर हमारे सौरमंडल से गुजरते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, इन धूमकेतुओं में अन्य तारकीय प्रणालियों की गैसों, बर्फ और धूल के रासायनिक तत्व मौजूद होते हैं, जो ब्रह्मांड के शुरुआती काल की झलक पेश करते हैं।

3I/ATLAS की गति और दृश्यता

यह धूमकेतु 2.1 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की जबरदस्त रफ्तार से यात्रा कर रहा है। 30 अक्टूबर 2025 को यह सूर्य के सबसे नज़दीकी बिंदु से गुजरा, और अब यह पृथ्वी से धीरे-धीरे दूर जा रहा है।

नवंबर की शुरुआत से ही यह पूर्वी आकाश में सूर्योदय से पहले देखा जा सकेगा। हालांकि यह नंगी आंखों से नहीं दिखेगा, लेकिन मध्यम आकार के टेलिस्कोप की मदद से इसे देखा जा सकता है। नवंबर और दिसंबर 2025 के बीच यह सबसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा।

यह पृथ्वी से लगभग 1.8 खगोलीय इकाई (लगभग 270 मिलियन किलोमीटर) की दूरी पर गुजरेगा, इसलिए इसके हमारे ग्रह से टकराने या किसी तरह का खतरा पैदा करने की कोई संभावना नहीं है।

वैज्ञानिक महत्व

3I/ATLAS की कथित तस्वीर ने वैज्ञानिकों को इसके रासायनिक और भौतिक संरचना का अध्ययन करने का नया अवसर दिया है। नासा के विशेषज्ञों का मानना है कि इस धूमकेतु में कार्बन डाइऑक्साइड और बर्फ के कण शामिल हो सकते हैं जो ठंडे तारामंडलीय क्षेत्रों में बने हैं।

वैज्ञानिक इस धूमकेतु के ज़रिए यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि अन्य तारामंडलों में ग्रह और धूमकेतु कैसे बनते हैं। चूंकि यह पृथ्वी के लिए सुरक्षित दूरी पर है, इसलिए यह पहली बार किसी इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट को नज़दीक से देखने का अवसर प्रदान कर रहा है।

जापान की एजेंसी की भूमिका और विवाद

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर एक यूज़र ने यह तस्वीर साझा की, जिसमें लिखा था —
“जापानी स्पेस एजेंसी ने स्पेक्ट्रम एनालिसिस और इमेजिंग डेटा के आधार पर 3I/ATLAS की संभावित तस्वीर जारी की है।”

इस पोस्ट के वायरल होते ही खगोल विज्ञान के क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई। हालांकि जापान की स्पेस एजेंसी ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन इससे दुनियाभर में इस रहस्यमयी इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट को लेकर रुचि बढ़ गई है।

3I/ATLAS को कैसे देखें?

जो लोग इस दुर्लभ धूमकेतु को देखना चाहते हैं, वे कुछ सावधानियों और उपकरणों की मदद से ऐसा कर सकते हैं:

  • सुबह सूर्योदय से पहले पूर्व दिशा में देखें।
  • मध्यम या बड़े आकार का टेलिस्कोप इस्तेमाल करें।
  • शहर की रोशनी से दूर, किसी अंधेरी और साफ जगह पर जाएं।
  • नवंबर और दिसंबर 2025 इस धूमकेतु को देखने का सबसे अच्छा समय रहेगा।

खगोल प्रेमी अपने क्षेत्र के ऑब्जर्वेशन क्लब्स या वेधशालाओं से जुड़कर डेटा साझा कर सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह हमारे समय की एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाला मौका हो सकता है, जब हम किसी दूसरे तारा मंडल से आए पिंड को अपनी आंखों से देख पाएंगे।

3I/ATLAS न केवल एक वैज्ञानिक खोज है, बल्कि यह ब्रह्मांड के रहस्यों की झलक भी पेश करता है। जापान की स्पेस एजेंसी द्वारा जारी कथित तस्वीर भले ही अभी अपुष्ट हो, लेकिन इसने खगोल विज्ञान की दुनिया में नई ऊर्जा और उत्सुकता पैदा कर दी है।

यह धूमकेतु याद दिलाता है कि हमारा सौरमंडल, चाहे जितना विशाल क्यों न लगे, अनंत ब्रह्मांड का सिर्फ एक छोटा हिस्सा है — और हर गुजरता इंटरस्टेलर विज़िटर हमें उस विशाल अज्ञात की झलक दिखाता है, जिसकी खोज अभी बाकी है।

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