सोशल संवाद/डेस्क : खाद्य वस्तुओं से लेकर ईंधन की बढ़ी कीमतों ने घर का बजट बिगाड़ कर रख दिया है। सोमवार को सामने आए आंकड़े इसी कड़वी सच्चाई पर मुहर लगाते हैं। अगस्त में खुदरा महंगाई दर उछलकर 4.82% पर पहुंच गई। वहीं, थोक महंगाई भी बढ़कर 9.92% हो गई, जो जुलाई में 9.78% थी। वर्ष 2024 के नए आधार वर्ष की श्रृंखला लागू होने के बाद से खुदरा महंगाई का यह सबसे उच्चतम स्तर है।
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आंकड़े बताते हैं कि साल की पहली छमाही में महंगाई दर के काफी हद तक कम रहने के बाद अब कीमतों का दबाव बढ़ने लगा है। जुलाई में खुदरा महंगाई दर 4.45% थी यानी यह आरबीआई के 4% के लक्ष्य से काफी ऊपर है। वहीं थोक महंगाई 10% के करीब पहुंच गई है। दोनों आंकड़े ऐसे समय आए हैं जब कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल व मौसम संबंधी जोखिम पहले से बने हुए हैं।
भोजन की थाली पर ज्यादा असरः
खाने-पीने की चीजों की कीमतें महंगाई दर बढ़ाने का मुख्य कारण बनी हुई हैं। खुदरा खाद्य महंगाई दर जुलाई के 5.52% से बढ़कर अगस्त में 5.95% हो गई। इसमें ग्रामीण खाद्य महंगाई 6.13%, शहरी खाद्य महंगाई 5.64% रही। महत्वपूर्ण बात यह है कि खुदरा महंगाई की तेजी केवल एक-दो खाद्य वस्तुओं तक सीमित नहीं रही है। परिवहन, रेस्तरां, कपड़े, शिक्षा और घरेलू सामान जैसी श्रेणियों में भी कीमतों का दबाव बढ़ा है। कुछ खाद्य वस्तुओं के दाम में असाधारण तेजी देखी गई। अगस्त में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं।
आगे भी सता सकती है महंगाईः
विशेषज्ञों के अनुसार, आगे महंगाई का रुझान मानसून की प्रगति और खाद्य उत्पादन के अनुमानों पर निर्भर करेगा। कुछ क्षेत्रों में असमान बारिश या मौसम की गड़बड़ी से मुख्य कृषि उत्पादों की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
कर्ज हो सकता है महंगा :
लगातार तीसरे महीने महंगाई में उछाल से कर्ज महंगा हो सकता है। बढ़ती महंगाई को रोकने के लिए आरबीआई रेपो दर में बढ़ोतरी कर सकता है। एसबीआई की इकोरैप रिपोर्ट में अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।










