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विज्ञापनों से जुड़े केंद्र के आदेश पर SC की रोक:सरकार ने आयुर्वेदिक-यूनानी दवाओं को नियम 170 से छूट दी थी; यह भ्रामक विज्ञापन रोकता है

By Tamishree Mukherjee

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सोशल संवाद /डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (27 अगस्त) को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 के नियम 170 हटाने के केंद्र के फैसले पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इससे जुड़ा आयुष मंत्रालय का नोटिफिकेशन भी रद्द कर दिया है। नियम 170 आयुर्वेदिक, सिद्ध या यूनानी दवाओं के भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाता है।

जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र को फटकार लगाई। कहा कि मंत्रालय का नोटिफिकेशन उसके 7 मई, 2024 के आदेश के खिलाफ है। सरकार कोर्ट के आदेश के बावजूद नियम 170 हटाने का फैसला कैसे कर सकते हैं?

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दरअसल, केंद्र ने 29 अगस्त, 2023 को एक लेटर जारी किया था। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नियम 170 के तहत कंपनियों पर कोई कार्रवाई शुरू या नहीं करने को कहा गया था।

नियम 170 को 2018 में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स,1945 में जोड़ा गया था। इसमें कहा गया कि आयुर्वेदिक, सिद्ध और यूनानी दवाएं, जिस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में बन रही है, वहां की लाइसेंसिंग अथॉरिटी के अप्रूवल के बिना विज्ञापन नहीं दिया जा सकेगा।

जस्टिस बोलीं- विज्ञापनों की जांच के लिए नियम 170 लगाई गई
जस्टिस कोहली ने कहा कि नियम 170 हटाने का क्या मतलब है। प्रकाशन से पहले विज्ञापनों पर प्रतिबंध या जांच लगाने के लिए नियम 170 लगाई गई थी। इसकी वापसी का मतलब है कि विज्ञापनों की जांच उसके छपने या प्रसारित होने के बाद ही की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर केंद्र स जवाब भी मांगा है। कोर्ट ने कहा कि सरकार से स्पष्टीकरण मिलने तक नियम 170 को हटाने वाली 1 जुलाई, 2024 की अधिसूचना स्थगित रहेगी। यानी कंपनियों के लिए यह कानून लागू रहेगी।

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