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कमीशन के चक्कर में स्कूलों ने ताक पर रखे नियम, चैप्टर बदल फिर बढ़ाई कीमत

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/जमशेदपुर : लौहनगरी के निजी स्कूलों में नए सत्र के आगाज के साथ ही शिक्षा के व्यापार ने रफ्तार पकड़ ली है। सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड के स्कूलों में इस साल किताबों की कीमतों में 8% से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहली कक्षा की किताबों का जो सेट पिछले साल 3100-3600 रुपए में मिला था, इस साल कीमत 4700 रुपए तक पहुंच गई है।

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इस तरह शहर के करीब 65 बड़े स्कूलों में पढ़ने वाले 1.25 लाख स्टूडेंट्स के अभिभावकों के कंधों पर इस साल 100 करोड़ रुपए से अधिक का किताबों का बोझ डाला गया है। अभिभावकों का आरोप है- स्कूल जानबूझकर हर साल प्रकाशकों के साथ मिलकर सिलेबस या चैप्टर बदल देते हैं ताकि पुरानी किताबों का विकल्प खत्म हो जाए। इस पूरे कारोबार का लगभग 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा सीधे स्कूल प्रबंधन की जेब में कमीशन के तौर पर जाता है। यही कारण है कि सरकारी रोक के बावजूद स्कूल परिसर के भीतर ही दुकानें सजाई जा रही हैं।

किताब बिक्री की मॉनिटरिंग के लिए एक साल बाद भी नहीं बन सकी कमेटी

शहर के निजी स्कूलों में किताब बिक्री को रोकने के लिए जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) कार्यालय ने पिछले वर्ष कई निर्देश जारी किए थे। इसमें कहा गया था-निजी स्कूल तीन साल से पहले किताब में किसी प्रकार का बदलाव नहीं कर सकेंगे। विभाग ने इसकी मॉनिटरिंग के लिए कमेटी बनाने की भी घोषणा की थी। लेकिन एक साल बाद भी यह कमेटी नहीं बन सकी है। निजी स्कूल अपने यहां किताब-कॉपी की बिक्री नहीं करेंगे, इसे लेकर भी निर्देश जारी किया गया था। कहा गया था- अगर कोई स्कूल अपने परिसर में किताब बेचता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इस आदेश के बाद भी कई स्कूलों द्वारा परिसर में किताब बेचे जा रहे हैं। हाल ही में अभिभावक मदन मोहन मिश्रा ने इसकी लिखित शिकायत भी डीसी से की है।

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