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वैज्ञानिक धान खेती से बदली पश्चिमी सिंहभूम की महिला किसान की तस्वीर, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन से मिली नई पहचान

By Tamishree Mukherjee

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Scientific paddy farming transforms the lives of women farmers in West Singhbhum

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सोशल संवाद / झारखण्ड : पश्चिमी सिंहभूम जिले में कृषि विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयास अब धरातल पर सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले के किसान खेती की नई तकनीकों को अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। इसका एक प्रेरणादायी उदाहरण सदर प्रखंड के तुईबीर पंचायत अंतर्गत पम्पड़ा गांव की महिला किसान बेलमती देवगम हैं, जिन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से धान की खेती कर न केवल अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।

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बेलमती देवगम एक साधारण कृषक परिवार से हैं। उनके परिवार में चार सदस्य हैं तथा परिवार की आजीविका मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। उनके पास कुल चार एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें दो एकड़ सिंचित एवं दो एकड़ असिंचित भूमि शामिल है। पहले वे परंपरागत तरीके से लगभग तीन एकड़ में धान तथा शेष भूमि पर मौसमी सब्जियों की खेती करती थीं। सीमित उत्पादन और बढ़ती लागत के कारण खेती से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति भी सामान्य बनी रहती थी।

इसी दौरान गांव के किसान मित्र के माध्यम से उन्हें प्रखंड स्तरीय खरीफ प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी मिली। उन्होंने प्रशिक्षण में भाग लिया, जहां कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने किसानों को धान उत्पादन की वैज्ञानिक पद्धति, बीज उपचार, नर्सरी प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, खरपतवार नियंत्रण, जल संरक्षण, पौधों की उचित दूरी पर रोपाई तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें प्रमाणित धान बीज भी उपलब्ध कराया गया तथा खेत में वैज्ञानिक विधि अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

प्रशिक्षण से प्रेरित होकर बेलमती देवगम ने खरीफ मौसम में पहली बार वैज्ञानिक पद्धति से धान की खेती प्रारंभ की। उन्होंने खेत में 25×25 सेंटीमीटर की दूरी पर एक-एक पौधे की रोपाई की, समय-समय पर खरपतवार नियंत्रण के लिए कोनो वीडर का उपयोग किया तथा कृषि विभाग द्वारा बताए गए सभी तकनीकी सुझावों का पालन किया। इससे पौधों की वृद्धि बेहतर हुई, अधिक संख्या में कल्ले निकले तथा फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

वैज्ञानिक पद्धति अपनाने के परिणामस्वरूप उन्हें पहले की तुलना में लगभग दोगुना उत्पादन प्राप्त हुआ। उत्पादन बढ़ने से न केवल परिवार के लिए वर्षभर पर्याप्त धान उपलब्ध हुआ, बल्कि अतिरिक्त उपज बेचकर उन्हें अच्छी आमदनी भी प्राप्त हुई। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई, बच्चों की शिक्षा, पोषण एवं अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में सुविधा मिली। आज वे आत्मविश्वास के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाते हुए खेती कर रही हैं तथा अपने आसपास के किसानों को भी वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

बेलमती देवगाम का कहना है कि कृषि विभाग से प्राप्त प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन ने उनकी खेती करने का नजरिया पूरी तरह बदल दिया है। अब वे प्रत्येक मौसम में नई तकनीकों को अपनाकर खेती करना चाहती हैं तथा विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लेने का संकल्प भी लिया है।

उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि “पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को अधिक लाभकारी बनाने तथा वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, तकनीकी प्रशिक्षण एवं विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। बेलमती देवगाम की सफलता यह दर्शाती है कि यदि किसान आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाएं तो कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त करना संभव है। जिला प्रशासन ऐसे सभी किसानों को हरसंभव सहयोग प्रदान करता रहेगा, ताकि जिले के अधिकाधिक किसान आत्मनिर्भर और समृद्ध बन सकें।”

जिला कृषि पदाधिकारी श्री अमरजीत हुजूर ने बताया कि “कृषि विभाग का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक एवं उन्नत कृषि पद्धतियों से जोड़ना है। विभाग नियमित रूप से प्रशिक्षण शिविर, कृषक गोष्ठी एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को नई तकनीकों की जानकारी दे रहा है। वैज्ञानिक धान खेती की पद्धति अपनाने से कम बीज, कम पानी और कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। बेलमती देवगम की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि किसान प्रशिक्षण में बताई गई तकनीकों का सही ढंग से पालन करें तो खेती लाभ का बेहतर माध्यम बन सकती है।”

लाभुक श्रीमती बेलमती देवगाम ने कहा कि “पहले मैं परंपरागत तरीके से खेती करती थी, लेकिन कृषि विभाग के प्रशिक्षण के बाद मैंने वैज्ञानिक पद्धति अपनाई। इससे धान का उत्पादन पहले की तुलना में काफी बढ़ा और परिवार की आय में भी वृद्धि हुई। अब खेती करने में आत्मविश्वास बढ़ गया है। मैं जिले के सभी किसानों, विशेषकर महिला किसानों से आग्रह करती हूं कि वे कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ उठाएं तथा आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी खेती को अधिक लाभकारी बनाएं।”

जिला प्रशासन किसानों से अपील करता है कि वे कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं तकनीकी मार्गदर्शन का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। वैज्ञानिक खेती अपनाकर न केवल उत्पादन और आय में वृद्धि की जा सकती है, बल्कि खेती को टिकाऊ, लाभकारी एवं आत्मनिर्भर आजीविका का सशक्त माध्यम भी बनाया जा सकता है। पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन किसानों की समृद्धि एवं कृषि विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्धहै

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