सोशल संवाद / डेस्क : केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को मिलने वाली रियायती एलपीजी (LPG) सुविधा में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब लाभार्थियों को पहले की तुलना में कम सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर मिलेंगे। इस फैसले का असर देश के करोड़ों परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
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सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या में कटौती
सरकार द्वारा किए गए बदलाव के अनुसार, उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिलने वाले सब्सिडी युक्त एलपीजी सिलेंडरों की वार्षिक संख्या घटा दी गई है। इससे उन परिवारों का खर्च बढ़ सकता है, जो घरेलू उपयोग के लिए पूरी तरह रसोई गैस पर निर्भर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों और सब्सिडी पर बढ़ते वित्तीय बोझ को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
करोड़ों परिवारों पर पड़ेगा असर
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत देशभर में करोड़ों गरीब और ग्रामीण परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। योजना का उद्देश्य पारंपरिक ईंधन जैसे लकड़ी, कोयला और गोबर के उपयोग को कम कर स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना था।
अब सब्सिडी में बदलाव के बाद लाभार्थियों को गैस सिलेंडर रिफिल कराने पर पहले से अधिक खर्च करना पड़ सकता है।
घरेलू बजट पर बढ़ेगा दबाव
विशेषज्ञों का कहना है कि रसोई गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और सब्सिडी में कमी का सीधा असर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां आय के सीमित स्रोत हैं, वहां यह फैसला घरेलू खर्च बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।
सरकार का क्या है तर्क?
सरकार का मानना है कि सब्सिडी को अधिक प्रभावी और लक्षित बनाने के लिए समय-समय पर योजनाओं की समीक्षा की जाती है। इसके तहत वित्तीय संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
हालांकि, विपक्षी दलों और उपभोक्ता संगठनों ने इस कदम पर चिंता जताते हुए कहा है कि इससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उज्ज्वला योजना का उद्देश्य
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इसका लाभार्थियों के गैस उपभोग और घरेलू खर्च पर कितना प्रभाव पड़ता है।









