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हाथियों के मूवमेंट पर दक्षिण पूर्व रेलवे जोन की दोहरी नीति — सिर्फ पैसेंजर ट्रेनें रद्द, मालगाड़ियाँ और सुपरफास्ट ट्रेनें चालू

By Tamishree Mukherjee

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elephant movement: Only passenger trains cancelled

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सोशल संवाद / रिपोर्ट – संजय सिन्हा : ओडिशा एवं झारखंड के लौहांचल क्षेत्रवासियों के साथ चक्रधरपुर रेल मंडल अब दोहरी नीति अपनाता नजर आ रहा है। “हाथी मूवमेंट” और “यात्री सुरक्षा” का हवाला देकर कई MEMU और पैसेंजर ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, जिनमें बरबिल–टाटानगर MEMU भी शामिल है।

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हैरानी की बात यह है कि इसी तथाकथित “खतरनाक” हाथी प्रभावित इलाके में लौह अयस्क से लदी भारी-भरकम मालगाड़ियाँ दिन-रात पूरी रफ्तार से बिना किसी रोक-टोक के चलाई जा रही हैं। इतना ही नहीं, हावड़ा–बरबिल जनशताब्दी एक्सप्रेस को टाटानगर जंक्शन से ही वापस हावड़ा भेज दिया गया। यानी साफ है कि इस ट्रेन का बरबिल आना फिर से रद्द कर दिया गया।

जनशताब्दी एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे सैकड़ों कन्फर्म टिकट वाले यात्री टाटानगर में फंसे रह गए। न कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई और न ही कोई पूर्व सूचना दी गई। सवाल यह है कि यदि ट्रेन को रद्द ही करना था, तो बरबिल तक के टिकट क्यों काटे गए?

अब यह सवाल उठना लाज़िमी हो गया है कि CKP डिवीजन में वर्षों से जनशताब्दी समेत अन्य ट्रेनें घंटों की देरी से चल रही हैं, लेकिन इस पर लगाम लगाना रेलवे के बस में क्यों नहीं है? इस दोहरी नीति के कारण दिहाड़ी मजदूर, खदान कर्मचारी, छात्र-छात्राएं और ग्रामीण यात्री सबसे अधिक परेशान हो रहे हैं। आखिर रेल अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद कब टूटेगी?

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