सोशल संवाद / रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने मनरेगा के तहत वर्षों से कार्यरत दैनिक कंप्यूटर ऑपरेटरों के हित में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि 10 वर्ष से अधिक समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग एजेंसियों के हवाले नहीं कर सकते। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इन कर्मियों के लिए स्वीकृत पद सृजित किए जाएं और उन्हें उन पदों पर समायोजित किया जाए। सेवा को वर्ष 2007 के नियमों के संरक्षण में रखा जाए। हाईकोर्ट के इस आदेश से करीब पांच हजार कर्मियों को लाभ पहुंचेगा।
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सोनू प्रसाद एवं अन्य तथा महिमा प्रकाश केरकेट्टा एवं अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि सरकार का संवैधानिक दायित्व अपने कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना है। सरकार अपने कर्मचारियों को ठेकेदारों की दया पर नहीं छोड़ सकती। आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कर्मचारियों के शोषण और नौकरी की असुरक्षा की आशंका अधिक रहती है, जबकि मनरेगा के सेवा नियम कर्मियों को वेतन, सेवा सुरक्षा और अन्य वैधानिक अधिकार प्रदान करते हैं। प्रार्थियों की ओर से पक्ष रखते हुए
अधिवक्ता सौरभ शेखर और अनुराग कुमार ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2007 से मनरेगा के तहत कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में दैनिक मजदूरी पर प्रार्थियों को नियुक्त किया गया था। वे 15 वर्ष से अधिक समय तक लगातार सरकारी कार्य करते रहे व नियमित कर्मचारियों के समान वेतन भी मिलता रहा, बावजूद सरकार ने उन्हें आउटसोर्सिंग कंपनियों के अधीन करने का निर्णय लिया।










