सोशल संवाद / डेस्क : Strawberry Moon 2026: जून महीने का पूर्णिमा का चंद्रमा, जिसे Strawberry Moon कहा जाता है, इस बार भी खगोल प्रेमियों के लिए खास आकर्षण बनने जा रहा है। हालांकि नाम सुनकर ऐसा लग सकता है कि चंद्रमा लाल या गुलाबी दिखाई देगा, लेकिन वास्तव में इसका रंग स्ट्रॉबेरी जैसा नहीं होता। आइए जानते हैं स्ट्रॉबेरी मून 2026 की तारीख, भारत में समय, इसके नाम का इतिहास और इसे देखने का सबसे अच्छा समय।

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क्या है Strawberry Moon?
Strawberry Moon जून महीने की पूर्णिमा को दिया गया पारंपरिक नाम है। यह नाम उत्तरी अमेरिका की मूल निवासी जनजातियों (Native American Tribes) से जुड़ा है, जो जून में जंगली स्ट्रॉबेरी की फसल पकने के समय इस पूर्णिमा को देखते थे। इसलिए इस पूर्णिमा को “Strawberry Moon” कहा जाने लगा।
Strawberry Moon 2026 कब दिखाई देगा?
भारत में Strawberry Moon का पीक इल्यूमिनेशन 30 जून 2026 की सुबह लगभग 5:27 बजे (IST) होगा। हालांकि सबसे शानदार नज़ारा 29 जून की शाम चंद्रमा के उदय (Moonrise) के समय देखने को मिलेगा, जब यह क्षितिज के पास बड़ा और सुनहरे रंग का दिखाई दे सकता है।
इस बार क्यों रहेगा खास?
इस वर्ष स्ट्रॉबेरी मून आकाश में सामान्य से अधिक नीचे दिखाई देगा। गर्मियों के संक्रांति (Summer Solstice) के करीब होने के कारण यह क्षितिज के पास लंबा समय बिताएगा, जिससे यह देखने में अधिक बड़ा और आकर्षक लग सकता है। यह प्रभाव मुख्य रूप से वातावरण और “Moon Illusion” के कारण होता है।
क्या वास्तव में लाल या गुलाबी होगा चांद?
नहीं। Strawberry Moon का नाम केवल पारंपरिक है। चंद्रमा का रंग सामान्यतः सफेद ही रहता है। हालांकि चंद्रमा के उदय के समय वायुमंडलीय प्रभाव के कारण यह हल्का सुनहरा, नारंगी या पीला दिखाई दे सकता है।
Strawberry Moon देखने के लिए अपनाएं ये टिप्स
- 29 जून की शाम चंद्रमा निकलते ही उसे देखें।
- शहर की तेज रोशनी से दूर खुली जगह चुनें।
- क्षितिज का साफ दृश्य मिलने वाली जगह सबसे बेहतर रहेगी।
- स्मार्टफोन या कैमरे से शुरुआती एक घंटे में शानदार तस्वीरें ली जा सकती हैं।
- दूरबीन या टेलीस्कोप जरूरी नहीं है, इसे नंगी आंखों से आसानी से देखा जा सकता है।
Strawberry Moon का सांस्कृतिक महत्व
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जून की पूर्णिमा को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। यूरोप में इसे हनी मून (Honey Moon) या मीड मून (Mead Moon) भी कहा जाता है। यह मौसम परिवर्तन और नई फसल के आगमन का प्रतीक माना जाता है।










