सोशल संवाद/डेस्क : माननीय परिवहन मंत्री, झारखंड सरकार के निर्देशानुसार जिला परिवहन पदाधिकारी गौतम कुमार के नेतृत्व में जिले के स्कूलों की अधिकृत बसों एवं विद्यार्थियों के परिचालन में लगे अन्य वाहनों के जांच अभियान की शुरुआत की गई। आज दिनांक 27/04/2026 को डीपीएस स्कूल एवं संत जेवियर स्कूल की बसों तथा अन्य वाहनों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान मोटर यान निरीक्षक नेल्सन तिर्की एवं सड़क सुरक्षा टीम मौजूद रही।

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जिला परिवहन पदाधिकारी ने बताया कि देश का भविष्य बच्चे तय करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है। सड़कों पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिवहन संबंधी सभी कागजातों के साथ माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।

जो विद्यालय प्रबंधन या वाहन स्वामी इन नियमों की अवहेलना करते पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आज की जांच के मुख्य बिंदु:
- परिवहन संबंधी इंश्योरेंस, फिटनेस, टैक्स, प्रदूषण प्रमाणपत्र, परमिट, ओवरलोडिंग आदि।
- सुप्रीम कोर्ट से प्राप्त दिशा-निर्देश एवं सुरक्षा मानक:
- स्कूल बस के आगे एवं पीछे स्पष्ट शब्दों में “School Bus” अंकित होना चाहिए।
- यदि बस किराये की है, तो “On School Duty” लिखा होना चाहिए।
- प्रत्येक स्कूल बस में प्राथमिक उपचार बॉक्स अनिवार्य रूप से उपलब्ध हो।
- प्रत्येक खिड़की में लोहे की ग्रिल (जाली) लगी हो।
- प्रत्येक बस में Fire Extinguisher उपलब्ध हो।
- स्कूल का नाम एवं दूरभाष संख्या बस पर अंकित हो।
- बस के दरवाजे में सुरक्षित एवं विश्वसनीय लॉक हो।
- विद्यार्थियों के स्कूल बैग रखने हेतु पर्याप्त जगह हो।
- प्रत्येक बस में विद्यालय की ओर से एक अटेंडेंट अनिवार्य रूप से तैनात हो।
- स्कूल बस की अधिकतम गति सीमा 40 किमी प्रति घंटा निर्धारित हो।
- चालक के पास वैध HMV/LMV लाइसेंस हो, जो कम से कम 5 वर्ष पुराना हो।
- चालक का ड्रेस कोड निर्धारित हो।
चालक के पास बस में सफर कर रहे बच्चों की सूची उपलब्ध हो, जिसमें नाम, कक्षा, पता, ब्लड ग्रुप, स्टॉपेज प्वाइंट एवं रूट प्लान अंकित हो।









