सोशल संवाद / जमशेदपुर: टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट को लेकर पर्यावरणीय स्वीकृति, एनओसी और Consent to Operate (CTO) की शर्तों के कथित उल्लंघन का मामला सामने आया है। इस संबंध में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) को कानूनी नोटिस भेजा गया है। नोटिस में टाटा स्टील के CTO को तत्काल रद्द करने और दिसंबर 2026 के बाद इसके नवीनीकरण पर रोक लगाने की मांग की गई है।
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जमशेदपुर निवासी रेयाज शरीफ की ओर से अधिवक्ता एके श्रीवास्तव ने 3 अक्टूबर को यह कानूनी नोटिस जारी किया। इसमें कहा गया है कि यदि 15 दिनों के भीतर मामले में कार्रवाई शुरू नहीं की गई, तो झारखंड हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की जा सकती है।
2021 के CTO पर उठाए गए सवाल
कानूनी नोटिस में 17 दिसंबर 2021 को जारी CTO का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि इसमें पहले से लागू कुछ अनिवार्य शर्तों, खासकर पुनर्वास से जुड़ी शर्तों को हटा दिया गया। नोटिस में 2008 की NOC और 2012 के CTO का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास की प्रगति रिपोर्ट हर तीन महीने में JSPCB को उपलब्ध कराना जरूरी था।
नोटिस के अनुसार, पुनर्वास में देरी होने या शैक्षणिक संस्थानों और मानव बस्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की स्थिति में सहमति रद्द करने का प्रावधान था।
प्रदूषण और ट्रैफिक व्यवस्था पर भी सवाल
कानूनी नोटिस में जमशेदपुर प्लांट से जुड़े वायु प्रदूषण और ट्रैफिक प्रबंधन का मुद्दा भी उठाया गया है। इसमें 24 घंटे एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग, उत्सर्जन नियंत्रण उपकरणों के संचालन और सामग्री की अधिकतम ढुलाई रेलवे वैगनों के जरिए करने जैसी शर्तों का उल्लेख किया गया है।
नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि शहर में धूल नियंत्रण के लिए कन्वेयर और मैकेनाइज्ड वैक्यूम क्लीनिंग जैसे उपाय प्रभावी तरीके से लागू नहीं किए जा रहे हैं।
PM10 स्तर को लेकर भी दावा
नोटिस में दावा किया गया है कि क्षेत्र में PM10 का स्तर 218 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया है, जबकि नोटिस में निर्धारित मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर बताया गया है। हालांकि, PM10 के इस आंकड़े और उससे जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है। यह आंकड़ा कानूनी नोटिस में किए गए दावे के रूप में सामने आया है।
200 एकड़ से अधिक भूमि और पुनर्वास का मुद्दा
नोटिस में बारी मैदान, आसपास के शैक्षणिक संस्थानों और श्रमिक कॉलोनियों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि कार्य सीमा के विस्तार के दौरान ‘No Additional Land Requirement’ की शर्त का उल्लंघन हुआ।
साथ ही, नोटिस में दावा किया गया है कि प्रभावित लोगों से आपत्तियां आमंत्रित करने और जनसुनवाई से जुड़ी प्रक्रिया का उचित तरीके से पालन नहीं किया गया। नोटिस में 200 एकड़ से अधिक अधिग्रहित भूमि को बहाल करने और संबंधित क्षेत्रों में पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की गई है।
15 दिन में कार्रवाई की मांग, नहीं तो PIL
कानूनी नोटिस के जरिए JSPCB से पुनर्वास संबंधी शर्तों को सख्ती से लागू कराने, वायु और ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने तथा टाटा स्टील से संबंधित रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजने का आग्रह किया गया है।
नोटिस में कहा गया है कि यदि 15 दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो झारखंड हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
टाटा स्टील के CTO की वैधता दिसंबर 2026 तक
टाटा स्टील के एक पर्यावरणीय अनुपालन दस्तावेज में JSPCB द्वारा जारी Consent to Operate को 31 दिसंबर 2026 तक वैध बताया गया है।
फिलहाल कानूनी नोटिस में लगाए गए आरोपों पर संबंधित नियामक प्राधिकरण की आगे की कार्रवाई का इंतजार है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि नोटिस में लगाए गए आरोप अभी जांच और संबंधित प्रक्रिया के अधीन हैं।











