Tata Steel News: 2045 तक कार्बन न्यूट्रल बनने की तैयारी तेज, STAP का गठन

By Tamishree Mukherjee

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Tata Steel Carbon Neutral 2045

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सोशल संवाद / जमशेदपुर : टाटा स्टील ने वर्ष 2045 तक कार्बन न्यूट्रल बनने के लक्ष्य और तकनीकी विकास की दिशा में अपनी रणनीति को मजबूत करने की पहल की है। कंपनी ने दुनिया भर में विकसित हो रही अत्याधुनिक तकनीकों का मूल्यांकन करने के लिए हाईपावर स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी असेसमेंट पैनल (STAP) का गठन किया है। इसके साथ ही टिस्को इंप्लॉइज हाउसिंग एंड वेलफेयर सोसाइटी की गवर्निंग काउंसिल का भी पुनर्गठन किया गया है। कंपनी के सीईओ एवं एमडी टीवी नरेंद्रन के हस्ताक्षर से जारी दो अलग-अलग सर्कुलर में इन बदलावों की जानकारी दी गई है।

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नई तकनीकों का आकलन करेगा STAP

टाटा स्टील की ओर से गठित स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी असेसमेंट पैनल का मुख्य काम वैश्विक स्तर पर विकसित हो रही नई और उन्नत तकनीकों की उपयोगिता, संभावित लाभ, लागत और व्यावहारिकता का आकलन करना होगा।

पैनल यह जांच करेगा कि कौन-सी तकनीक कंपनी की उत्पादन प्रक्रियाओं और दीर्घकालिक व्यावसायिक रणनीति के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। मूल्यांकन में सफल तकनीकों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सीधे टाटा स्टील बोर्ड को भेजी जाएगी। इसके आधार पर कंपनी तय करेगी कि किन तकनीकों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ना है।

सुबोध पांडेय को मिली पैनल की जिम्मेदारी

स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी असेसमेंट पैनल का अध्यक्ष वाइस प्रेसिडेंट (टेक्नोलॉजी, आरएंडडी, एनएमबी एवं ग्राफीन) सुबोध पांडेय को बनाया गया है। वहीं, चीफ आईपी काउंसिल एवं टेक्नोलॉजी इंटेलिजेंस मुनीश सूदन पैनल के संयोजक होंगे।

पैनल में शैलेन शर्मा, सुमितेश दास, अनूप कुमार त्रिवेदी, अतनु रंजन पाल, सिद्धार्थ मिश्रा और टी. भास्कर को सदस्य बनाया गया है। इसमें भारत के अलावा नीदरलैंड और ब्रिटेन स्थित टाटा स्टील के शोध एवं तकनीकी केंद्रों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

जरूरत पड़ने पर पैनल वैश्विक स्तर के बाहरी विशेषज्ञों की सहायता भी ले सकेगा। इसका उद्देश्य नई तकनीकों का निष्पक्ष और विस्तृत मूल्यांकन कर कंपनी के लिए उपयुक्त विकल्पों की पहचान करना है।

2045 तक कार्बन न्यूट्रल बनने के लक्ष्य पर जोर

टाटा स्टील का यह कदम कंपनी के दीर्घकालिक तकनीकी रोडमैप और 2045 तक कार्बन न्यूट्रल बनने के लक्ष्य के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। इस्पात उत्पादन में ऊर्जा की खपत और कार्बन उत्सर्जन को कम करना उद्योग के सामने बड़ी चुनौतियों में शामिल है।

ऐसे में नई तकनीकों की पहचान और उनके व्यावहारिक इस्तेमाल का मूल्यांकन कंपनी की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है। पैनल यह तय करने में मदद करेगा कि कौन-सी तकनीक उत्पादन को अधिक टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल और प्रतिस्पर्धी बनाने में उपयोगी होगी।

हालांकि, किसी तकनीक को अपनाने का अंतिम फैसला मूल्यांकन और कंपनी बोर्ड के रणनीतिक निर्णयों के आधार पर लिया जाएगा।

टिस्को इंप्लॉइज हाउसिंग एंड वेलफेयर सोसाइटी की काउंसिल का पुनर्गठन

तकनीकी पैनल के गठन के साथ टाटा स्टील ने टिस्को इंप्लॉइज हाउसिंग एंड वेलफेयर सोसाइटी की गवर्निंग काउंसिल में भी बदलाव किया है। यह पुनर्गठन कंपनी में हाल के संगठनात्मक बदलावों के मद्देनजर किया गया है।

नई गवर्निंग काउंसिल में टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नू और महासचिव सतीश सिंह को शामिल किया गया है। इसके अलावा डी. बी. सुंदरा रामम, अतुल भटनागर, शैलेश सिंह, अमिता खुराना, अमित कुमार सिंह, अवनिश अरुण, आनंद कुमार और ज्ञानेंद्र करण को भी सदस्य बनाया गया है। यह बदलाव 19 नवंबर 2025 को जारी पूर्व सर्कुलर के संदर्भ में तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

कर्मचारियों के आवास और कल्याण से जुड़े मामलों पर रहेगी नजर

टिस्को इंप्लॉइज हाउसिंग एंड वेलफेयर सोसाइटी कर्मचारियों के आवास और कल्याण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में गवर्निंग काउंसिल में टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष और महासचिव को शामिल किए जाने से कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर यूनियन की भागीदारी बनी रहेगी।

दोनों सर्कुलर के जरिए टाटा स्टील ने एक ओर तकनीकी मूल्यांकन की व्यवस्था को मजबूत किया है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारी आवास एवं कल्याण से जुड़ी संस्था की गवर्निंग काउंसिल में बदलाव किया है।

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