सोशल संवाद / जमशेदपुर: टाटा स्टील UISL ने सतत अपशिष्ट जल प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की है। कंपनी ने खरकई एन्क्लेव, मरीन ड्राइव, सोनारी के पास स्थित 500 KLD पैकेज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में उन्नत अपशिष्ट जल उपचार तकनीक को अपनाया है।
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यह नई तकनीक इलेक्ट्रो ऑक्सीडेशन-इलेक्ट्रो कोएगुलेशन के सिद्धांत पर काम करती है। इसे M/s Inphlox Water Systems ने विकसित किया है। कंपनी के अनुसार, यह तकनीक पारंपरिक जैविक उपचार प्रणालियों का एक प्रभावी विकल्प हो सकती है और इसके संचालन के साथ पर्यावरणीय स्तर पर भी कई फायदे हैं।
कम जगह और कम ऊर्जा में होगा अपशिष्ट जल उपचार
नई उपचार प्रणाली को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें कम जगह की आवश्यकता होती है। इसका डिजाइन मॉड्यूलर और स्केलेबल है। यानी भविष्य में जरूरत बढ़ने पर इसकी क्षमता में अपेक्षाकृत आसानी से विस्तार किया जा सकता है।
यह प्रणाली पारंपरिक उपचार प्रक्रियाओं की तुलना में कम ऊर्जा की खपत करती है। इसके अलावा इससे कम मात्रा में स्लज और दुर्गंध उत्पन्न होने की बात कही गई है। इससे अपशिष्ट जल उपचार के दौरान होने वाले पर्यावरणीय और परिचालन प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।
पोर्टेबल रिएक्टर से संचालन में मिलेगी सुविधा
इस तकनीक की प्रमुख विशेषताओं में इसका पोर्टेबल रिएक्टर शामिल है। इसमें प्लग-इन और प्लग-आउट की सुविधा दी गई है। इसके जरिए प्लांट को जरूरत के अनुसार शुरू या बंद किया जा सकता है।
प्लांट के बंद रहने के दौरान बायोमास कल्चर को बनाए रखने की जरूरत नहीं होती। इससे प्लांट के संचालन में अधिक लचीलापन और सुविधा मिलने की उम्मीद है।
जल प्रबंधन में आधुनिक तकनीक पर जोर
टाटा स्टील UISL के अनुसार, इस तकनीक को अपनाना कंपनी की नवाचार, पर्यावरणीय स्थिरता और जिम्मेदार जल प्रबंधन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कंपनी का कहना है कि यह पहल शहरी अपशिष्ट जल उपचार की दक्षता बढ़ाने के लिए आधुनिक और टिकाऊ समाधान अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
डी. बी. सुंदर रामम ने किया उद्घाटन
500 KLD STP में स्थापित इस सुविधा का उद्घाटन टाटा स्टील के उपाध्यक्ष डी. बी. सुंदर रामम ने किया। इस अवसर पर टाटा स्टील UISL के प्रबंध निदेशक अतुल कुमार भटनागर, वरिष्ठ महाप्रबंधक-सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण वी. पी. सिंह, महाप्रबंधक-जल एवं अपशिष्ट जल सेवाएं संजीव कुमार झा तथा टाटा स्टील यूटिलिटी सर्विसेज श्रमिक यूनियन के अध्यक्ष रघुनाथ पांडेय समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
यह पहल जमशेदपुर में अपशिष्ट जल के उपचार और पुन: उपयोग से जुड़ी व्यवस्थाओं में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।










