सोशल संवाद / नई दिल्ली: संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर कित्तूर रानी चेन्नम्मा की जयंती और 202वें विजय उत्सव का आयोजन भव्य तरीके से किया गया। केंद्रीय रेल एवं जल शक्ति राज्य मंत्री और तुमकुर से सांसद वी. सोमन्ना के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल समेत कई प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान सभी ने वीरांगना रानी चेन्नम्मा को पुष्पांजलि अर्पित कर उनके साहस और बलिदान को याद किया।
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ओम बिरला और सी.आर. पाटिल समेत कई हस्तियां शामिल
कार्यक्रम में सांसद पी.सी. मोहन, डॉ. सुधाकर, पूर्व मंत्री मुरुगेश निरानी और बसनगौड़ा पाटिल यतनाल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। इसके अलावा कर्नाटक के पूर्व विशेष प्रतिनिधि शंकरगौड़ा पाटिल, विभिन्न मठों के संतों और कर्नाटक के अलग-अलग जिलों के साथ दिल्ली में रहने वाले बड़ी संख्या में कन्नड़ समुदाय के लोगों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
वी. सोमन्ना ने रानी चेन्नम्मा के साहस को किया याद
सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना ने रानी चेन्नम्मा की जयंती और अंग्रेजों के खिलाफ उनकी ऐतिहासिक विजय के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कित्तूर की वीरांगना रानी चेन्नम्मा केवल एक रानी नहीं थीं, बल्कि उन्होंने औपनिवेशिक सत्ता को चुनौती देकर इतिहास में प्रतिरोध और वीरता की अमिट मिसाल कायम की।
मंत्री ने कहा कि संसद परिसर के प्रेरणा स्थल पर रानी चेन्नम्मा की वीरता को याद करना गर्व की बात है। उनका साहस और देशप्रेम आज भी देश की रक्षा करने वाले जवानों और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
प्रधानमंत्री मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का जताया आभार
वी. सोमन्ना ने इस आयोजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल, लोकसभा के अधिकारियों और रेल मंत्रालय के सहयोग की भी सराहना की। साथ ही रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
संतों ने पहल की सराहना की
कार्यक्रम में उपस्थित पूज्य बसव मृत्युंजय स्वामीजी ने संसद परिसर के प्रेरणा स्थल पर हर साल रानी चेन्नम्मा की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित करने की पहल पर प्रसन्नता व्यक्त की। आयोजन का उद्देश्य वीरांगना के योगदान को याद करना और उनके संघर्ष, साहस तथा देशभक्ति की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना रहा।










