आदिवासी संस्कृति की रक्षा के लिए कृत-संकल्पित है भाजपा : चम्पाई सोरेन

By Riya Kumari

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आदिवासी संस्कृति की रक्षा के लिए कृत-संकल्पित है भाजपा : चम्पाई सोरेन

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सोशल संवाद / जमशेदपुर: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने आज नई दिल्ली में आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम में भाग लेने जा रहे सैकड़ों लोगों के जत्थे को टाटानगर रेलवे स्टेशन से रवाना किया। जनजाति सुरक्षा मंच के तत्वावधान में लाल किले में होने जा रहे इस समागम में देश भर के लाखों आदिवासी शामिल होंगे।

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इस अवसर पर उन्होंने देश में आदिवासियों की दुर्दशा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए, उस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने झारखंड आंदोलन के दौरान हमेशा आदिवासियों एवं मूलवासियों पर लाठी चार्ज करवाने तथा गोलियां चलवाने का काम किया है। अगर कांग्रेस आदिवासियों की हितैषी होती तो अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे आदिवासी धर्म कोड को 1961 की जनगणना में नहीं हटाती।

पूर्व सीएम ने याद दिलाया कि सन 1967 में बाबा कार्तिक उरांव ने संसद में डिलिस्टिंग प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें उन्होंने धर्म बदल चुके लोगों को आरक्षण से बाहर करने की बात कही थी। उनके प्रस्ताव को तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा संसदीय समिति को भेज दिया गया।

इस विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति ने बहुत छानबीन की और 17 नवंबर 1969 को अपनी सिफारिशें दीं। उनमें प्रमुख सिफारिश यह थी कि कोई भी व्यक्ति, जिसने आदिवासी परंपराओं का परित्याग कर दिया हो और ईसाई या इस्लाम धर्म ग्रहण कर लिया हो, वह अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं समझा जाएगा। मतलब धर्म परिवर्तन के बाद उस व्यक्ति को अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत मिलने वाली सुविधाओं से वंचित होना पड़ेगा।

उसके बाद भी जब साल भर तक कुछ नहीं हुआ तो कार्तिक उरांव जी ने 322 लोकसभा सदस्य और 26 राज्यसभा सदस्यों के हस्ताक्षरों का एक पत्र तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को दिया, जिसमें यह कहा गया था की वे विधेयक की सिफारिशों का स्वीकार करें, क्योंकि यह करोड़ों आदिवासियों के अस्तित्व का प्रश्न हैं। किंतु ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में कांग्रेस सरकार ने विधेयक को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

पूर्व सीएम ने कहा कि एक ओर कांग्रेस हमेशा आदिवासियों के उत्पीड़न में लगी हुई थी, वहीं दूसरी ओर भाजपा ने सत्ता में आते ही आदिवासी विद्यार्थियों के लिए सैकड़ों एकलव्य स्कूल बनवाए, भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के तौर पर घोषित किया तथा समाज के विकास हेतु पीएम जनमन योजना समेत दर्जनों योजनाएं शुरू कीं। पहली बार एक आदिवासी महिला को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठने का गौरव भी भाजपा के कार्यकाल में ही मिला। 

झारखंड कांग्रेस द्वारा जनजाति सांस्कृतिक समागम के बहिष्कार की अपील पर बिफरे चम्पाई सोरेन ने कहा कि यह पार्टी हमेशा से आदिवासी विरोधी रही है। आज अगर आदिवासी समाज रूढ़िजन्य परंपराओं, प्रथाओं, सभ्यता एवं संस्कृति को बचाने के लिए जागरूक हो रहा है, तो इसमें कांग्रेस के सांसदों एवं विधायकों को क्या दिक्कत है?

उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के दिखाए राह पर चलते हुए अगर हमलोग अपनी परंपराओं को नहीं बचाएंगे तो भविष्य में हमारे जाहेरस्थानों, सरना स्थलों, देशाउली आदि में पूजा करने वाला कोई नहीं बचेगा। इसलिए देश भर के आदिवासी केंद्र सरकार से यह मांग कर रहे हैं कि डीलिस्टिंग को लागू किया जाए तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 में जरूरी संशोधन कर के, हजारों साल पुरानी हमारी संस्कृति को बचाया जाए।

ज्ञात हो कि जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा नई दिल्ली के लाल किले में आगामी 24 मई को एक विशाल जनजाति सांस्कृतिक समागम का आयोजन किया गया है, जिसमें देश भर के लाखों आदिवासी शामिल होंगे। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गृह मंत्री अमित शाह होंगे तथा इसमें पूर्व सीएम चम्पाई सोरेन समेत कई प्रमुख आदिवासी नेता जुटेंगे।

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