सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड सरकार ने केंद्र के संशोधित MMDR (Mines and Minerals Development and Regulation) Act के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बुधवार को कहा कि संशोधित कानून से झारखंड को खनिज से मिलने वाले राजस्व में बड़ा नुकसान हो सकता है। सरकार का दावा है कि इससे राज्य को करीब 14 हजार करोड़ रुपये के राजस्व से हाथ धोना पड़ सकता है।
यह भी पढ़े :झारखंड कैबिनेट के 53 प्रस्तावों पर लगी मुहर, मेडिकल कॉलेज से लेकर स्कूलों तक बड़े फैसले
वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद राज्य सरकार इस मामले को कानूनी तरीके से आगे बढ़ाएगी। सरकार का कहना है कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और खनिज अधिकारों से जुड़े राजस्व का राज्य की अर्थव्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान है।
राधाकृष्ण किशोर के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में राज्य ने खनिज सेस से करीब 14 हजार करोड़ रुपये की आय का अनुमान लगाया था। संशोधित कानून लागू होने के बाद इस अनुमानित आय पर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इससे मंईयां सम्मान योजना समेत कई सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के लिए राज्य के वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है।
वित्त मंत्री ने यह भी दावा किया कि VB-G RAM G के लागू होने और GST दरों के युक्तिकरण से राज्य को करीब चार-चार हजार करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इन नुकसानों को MMDR से संभावित 14 हजार करोड़ रुपये के नुकसान के साथ जोड़ें तो राज्य पर कुल वित्तीय दबाव करीब 22 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
सरकार का तर्क है कि खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकार और उनसे मिलने वाला राजस्व झारखंड जैसे खनिज उत्पादक राज्यों के आर्थिक हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। राज्य सरकार ने कहा है कि वह इस मुद्दे को लोकतांत्रिक और कानूनी दोनों स्तरों पर उठाएगी।
इधर, MMDR संशोधन को लेकर झारखंड में राजनीतिक विरोध भी तेज हो रहा है। कांग्रेस ने भी आज से चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन शुरू करने की बात कही है। वहीं, केंद्र की ओर से संशोधन को लेकर राज्यों के राजस्व अधिकारों पर अलग तर्क दिया जा रहा है।









