इटोर गांव में दो दिवसीय पारंपरिक छऊ नृत्य सह मेला का भव्य समापन, कलाकारों ने बांधा समां

By Riya Kumari

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इटोर गांव में दो दिवसीय पारंपरिक छऊ नृत्य सह मेला का भव्य समापन, कलाकारों ने बांधा समां

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सोशल संवाद / डेस्क : चक्रधरपुर प्रखंड के इटोर गांव में आयोजित दो दिवसीय पारंपरिक छऊ नृत्य सह मेला शुक्रवार को भव्य समापन के साथ संपन्न हो गया। मेले में गांव के साथ-साथ आसपास के कई क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और देर रात तक चले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया।

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छऊ कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

समापन समारोह में ऊपर टोला और नीचे टोला के छऊ कलाकारों ने पौराणिक कथाओं, वीर गाथाओं और लोक संस्कृति पर आधारित शानदार नृत्य प्रस्तुत किए। कलाकारों की आकर्षक वेशभूषा, रंग-बिरंगे मुखौटे और ढोल-नगाड़ा व शहनाई की धुन ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया।

भगवानों, वीर योद्धाओं और लोक कथाओं पर आधारित प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। ग्रामीणों ने कलाकारों की प्रस्तुति की जमकर सराहना की।

मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए सन्नी उरांव

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नगर परिषद अध्यक्ष सन्नी उरांव उपस्थित रहे। वहीं उप प्रमुख विनय प्रधान एवं मुखिया सोमनाथ कोया विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। अतिथियों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगर अध्यक्ष सन्नी उरांव ने कहा कि छऊ नृत्य हमारी समृद्ध आदिवासी और लोक संस्कृति की पहचान है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में पारंपरिक कला और संस्कृति को बचाए रखना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि गांवों में इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं। साथ ही छऊ नृत्य के माध्यम से हमारी संस्कृति आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचती है।

लोक कला को बढ़ावा देने पर दिया जोर

विशिष्ट अतिथि विनय प्रधान और मुखिया सोमनाथ कोया ने भी आयोजन समिति और कलाकारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में छऊ नृत्य जैसी लोक कलाओं को बढ़ावा देने की जरूरत है, ताकि स्थानीय कलाकारों को मंच मिल सके और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान मजबूत हो।

ग्रामीणों का रहा अहम योगदान

मेला को सफल बनाने में ग्रामीण मुंडा लखन हेंब्रम, बिंदेश्वर गागराई, कृष्ण हेंब्रम, परिचित प्रधान, कुबेर प्रधान, गोलू सोय, राजेंद्र हेंब्रम, पोंडे सोय, शिवचरण गागराई, सीताराम गोप, सागर गागराई, सिद्धार्थ प्रधान और कैलाश गिरी सहित कई ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने में भी समिति के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। समापन अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण और ऐसे आयोजनों को आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया।

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