सोशल संवाद / डेस्क : यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) की तुरामडीह माइंस को लेकर उत्पादन में गिरावट, ठेका कार्यों में कथित अनियमितता, निर्माण सामग्री के कथित दुरुपयोग और विस्फोटक परिवहन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप सामने आए हैं। भाजपा नेता सतीश सिंह ने इन मामलों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
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UCIL की आधिकारिक जानकारी के अनुसार तुरामडीह एक भूमिगत यूरेनियम खदान है, जो वर्ष 2003 में शुरू हुई थी। यहां आधुनिक ट्रैकलेस माइनिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है और खदान से निकला अयस्क तुरामडीह मिल में प्रोसेस किया जाता है।
₹1.39 करोड़ के वर्क ऑर्डर को लेकर सवाल
सतीश सिंह के आरोप के मुताबिक, 24 नवंबर 2025 को जारी वर्क ऑर्डर संख्या GEMC-511687761339113 के तहत तुरामडीह माइंस में करीब ₹1.39 करोड़ के Underground Miscellaneous Civil कार्यों का ठेका दिया गया था।
आरोप है कि निर्धारित भूमिगत कार्यों के बजाय ठेके के प्रावधानों से अलग सड़क निर्माण समेत अन्य सतही कार्य कराए जा रहे हैं। इस मामले में वर्क ऑर्डर की शर्तों और वास्तविक काम की जांच की मांग की गई है।
रॉक बोल्ट, सीमेंट और अयस्क के इस्तेमाल पर भी सवाल
प्रेस नोट में आरोप लगाया गया है कि भूमिगत खनन कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाली रॉक बोल्ट छड़, बड़ी मात्रा में सीमेंट और ठेका मजदूरों का इस्तेमाल सतही सड़क निर्माण में किया गया।
सबसे गंभीर आरोप यूरेनियम अयस्क के कथित इस्तेमाल को लेकर है। दावा किया गया है कि खदान से निकलने वाले यूरेनियम युक्त पत्थरों/अयस्क का सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है और इसकी वास्तविकता जांच का विषय है।
UCIL के आधिकारिक रिकॉर्ड में तुरामडीह क्षेत्र को यूरेनियम खनिजीकरण वाला क्षेत्र बताया गया है तथा कंपनी की जानकारी के अनुसार यहां से उत्पादित अयस्क को प्रसंस्करण के लिए तुरामडीह मिल भेजा जाता है।
रद्द RC वाले वाहनों से विस्फोटक परिवहन का आरोप
सतीश सिंह ने आरोप लगाया है कि तुरामडीह माइंस में कथित तौर पर रद्द RC वाले वाहनों से विस्फोटक सामग्री का परिवहन कराया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि ऐसा पाया जाता है तो यह खदान की सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित नियमों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों से नहीं हो सकी है। इसलिए मामले में परिवहन दस्तावेज, वाहन की वैधता, परमिट और विस्फोटक सामग्री के परिवहन से जुड़े सुरक्षा रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी।
चालक को मैगजीन क्लर्क बनाने का आरोप
प्रेस नोट में खान प्रबंधन पर संजीत कुमार बारीक नामक चालक को कथित तौर पर ‘मैगजीन क्लर्क’ के रूप में तैनात करने का भी आरोप लगाया गया है। मैगजीन से आशय विस्फोटक सामग्री के सुरक्षित भंडारण और प्रबंधन से जुड़े क्षेत्र से है।
आरोप लगाने वाले पक्ष ने सवाल उठाया है कि संबंधित व्यक्ति की योग्यता, नियुक्ति आदेश, प्रशिक्षण और तैनाती की प्रक्रिया क्या थी। इन बिंदुओं की आधिकारिक जांच की मांग की गई है।
उत्पादन में गिरावट की भी जांच की मांग
भाजपा नेता सतीश सिंह ने तुरामडीह माइंस में पिछले कुछ महीनों के उत्पादन आंकड़ों की समीक्षा की मांग की है। उनका आरोप है कि उत्पादन में गिरावट के साथ-साथ प्रबंधन स्तर पर लिए गए फैसलों की भी जांच होनी चाहिए।
UCIL की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार तुरामडीह झारखंड में कंपनी के प्रमुख यूरेनियम संचालन क्षेत्रों में शामिल है। कंपनी के झारखंड ऑपरेशंस में जादुगुड़ा, भाटिन, तुरामडीह, बागजाता, नरवापहाड़, बंदुहुरांग और मोहुलडीह जैसी खदानें तथा जादुगुड़ा और तुरामडीह मिल शामिल हैं।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
सतीश सिंह ने सरकार और UCIL के उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने उत्पादन में गिरावट, कथित वित्तीय अनियमितताओं, वर्क ऑर्डर के उल्लंघन, निर्माण सामग्री के इस्तेमाल, यूरेनियम अयस्क के कथित दुरुपयोग, विस्फोटक परिवहन और मैगजीन से जुड़ी तैनाती की जांच की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल इन आरोपों पर UCIL प्रबंधन या संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है। आरोपों की पुष्टि के लिए वर्क ऑर्डर, माप पुस्तिका, भुगतान रिकॉर्ड, वाहन दस्तावेज, विस्फोटक परिवहन रिकॉर्ड और कर्मचारियों की नियुक्ति/तैनाती से जुड़े दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी।












