सोशल संवाद / डेस्क : वैश्चिक जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही है. ऐसे में संयुक्त राष्ट्र ने अपनी नयी जलवायु रिपोर्ट में चेतावनी दी गयी है कि अगले पांच वर्षों के दौरान पृथ्वी का तापमान कई बार उस अंतरराष्ट्रीय सीमा से ऊपर जा सकता है, जिसे अब तक सुरक्षित माना जाता रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान पृथ्वी के सबसे गर्म वर्ष का रिकॉर्ड भी कई बार टूट सकता है.

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2030 तक हर वर्ष का तापमान 19वीं सदी के अंत की तुलना में 1.3 से 1.9 डिग्री सेल्सियस अधिक रहेगा. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने यह भी अनुमान जताया है कि 2030 तक आर्कटिक क्षेत्र का तापमान करीब 1.66 डिग्री सेल्सियस बढ़ सकता है. इसके साथ ही अमेजन क्षेत्र में गंभीर सूखे और जंगल की आग का खतरा भी बढ़ सकता है. डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट के अनुसार, अगले पांच वर्षों में कम से कम एक वर्ष के 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा पार करने की 91 प्रतिशत आशंका है. वहीं, 2024 में बने पृथ्वी के सबसे गर्म वर्ष के रिकॉर्ड के टूटने की आशंका 86 प्रतिशत बतायी गयी है.
सुरक्षित स्तर से 1.5 डिग्री ऊपर जा सकता है तापमान
संयुक्त राष्ट्र की जलवायु एजेंसी और ब्रिटेन के मौसम विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 से 2030 के बीच औसत वैश्विक तापमान के औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहने की 75 प्रतिशत आशंका है. यही वह सीमा है जिसे 2015 के पेरिस जलवायु समझौते में सुरक्षित माना गया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि तापमान में मामूली वृद्धि भी मौत, खतरे और जीव-जंतुओं की प्रजातियों के नुकसान का कारण बन सकती है. कोरल रीफ और ग्लेशियर जैसे कई प्राकृतिक तंत्र इस अतिरिक्त दबाव को सहन नहीं कर पायेंगे.
कोयला, तेल व गैस के इस्तेमाल से बढ़ रही गर्मी
वैज्ञानिकों ने कहा कि कोयला, तेल और गैस के इस्तेमाल से वैश्विक गर्मी बढ़ रही है. इसके कारण बाढ़, सूखा और भीषण गर्मी जैसी चरम मौसमी घटनाएं अधिक होंगी.
2028 तक रहेगा अल नीनो का असर
कम अवधि के लगभग सभी मौसम पूर्वानुमानों में शक्तिशाली ‘अल नीनो’ बनने की संभावना जतायी गयी है. अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य हिस्से में होने वाली प्राकृतिक गर्मी है, जो दुनियाभर के मौसम को प्रभावित करती है और वैश्विक तापमान बढ़ाती है. डब्ल्यूएमओ ने कहा कि इसका असर 2028 तक रह सकता है. ब्रिटेन के मौसम विभाग की जलवायु वैज्ञानिक मेलीसा सीबुक के अनुसार, इसी कारण 2027 में 2024 का गर्मी का रिकॉर्ड टूट सकता है.
तापमान वृद्धि रोकने का प्रयास पीछे छूटा
संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टिल ने कहा, हाल के वर्षों में कुछ प्रगति जरूर हुई है, लेकिन वैश्विक तापमान वृद्धि को रोकने के प्रयास अभी भी पीछे छूट रहे हैं. यूरोप, भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी यह दिखाती है कि अब भी भारी मात्रा में कोयला, तेल और गैस का इस्तेमाल हो रहा है जिसके गंभीर मानवीय और आर्थिक दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं.
चाहे वह भीषण गर्मी हो, बड़े तूफान, बाढ़, जंगल की आग या खाद्य आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित करने वाला सूखा हो, दुनिया का हर देश इस वैश्विक जलवायु संकट की भारी कीमत चुका रहा है. अमेजन के जंगलों में खतरनाक सूखा पड़ने और भीषण आग लगने की आशंका भी जताई गई है, जो मानव जनित जलवायु परिवर्तन को कम करने में पृथ्वी की प्राकृतिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.









