मानसून सत्र में एकजुट विपक्ष ने मोदी सरकार के जनविरोधी एजेंडे को नाकाम किया, प्रमुख विधेयकों को रोका : कांग्रेस

By Riya Kumari

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मानसून सत्र में एकजुट विपक्ष ने मोदी सरकार के जनविरोधी एजेंडे को नाकाम किया, प्रमुख विधेयकों को रोका : कांग्रेस

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सोशल संवाद / नई दिल्ली :  कांग्रेस ने कहा है कि संसद के मानसून सत्र में एकजुट विपक्ष ने मोदी सरकार के जनविरोधी एजेंडे को नाकाम कर दिया और प्रमुख विधेयकों को पारित होने से रोक दिया। पार्टी ने कहा कि विपक्ष के दबाव के चलते वन नेशन वन इलेक्शन, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान और 130वें संविधान संशोधन से जुड़े विधेयक टल गए, जबकि एफसीआरए विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजना पड़ा। कांग्रेस ने यह भी कहा कि सरकार दो-तिहाई बहुमत जुटाने की तमाम कोशिशों के बावजूद परिसीमन विधेयक को आगे नहीं बढ़ा सकी। पार्टी ने कहा कि इस सत्र के दौरान मोदी सरकार पूरी तरह बैकफुट पर रही और उसमें अभूतपूर्व डर व बौखलाहट देखने को मिली।

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कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश और लोकसभा में पार्टी के उप नेता गौरव गोगोई ने कहा कि इस सत्र ने विपक्षी दलों की नई ऊर्जा एवं अटूट एकता को प्रदर्शित किया और यह साबित कर दिया कि वे देश के लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़े हैं।

जयराम रमेश ने सत्र में विपक्ष की प्रमुख उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि भारी दबाव के कारण सरकार के चार मुख्य विधेयक रुक गए। उन्होंने बताया कि विपक्ष की एकजुटता को देखते हुए सरकार को वन नेशन वन इलेक्शन और विश्वविद्यालयों के केंद्रीकरण से जुड़े विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक को शीतकालीन सत्र तक टालने को मजबूर होना पड़ा। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों की बर्खास्तगी से जुड़ा 130वां संविधान संशोधन विधेयक भी टल गया। एफसीआरए विधेयक को भी विपक्ष और सिविल सोसाइटी के निरंतर दबाव के चलते संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने को मजबूर होना पड़ा।

जयराम रमेश ने कहा कि सत्तापक्ष ने दूसरी पार्टियों को तोड़कर दो-तिहाई बहुमत जुटाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सका और परिसीमन विधेयक को भी दोबारा पेश नहीं करा पाया। उन्होंने इसे विपक्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि वर्ष 2026 का मानसून सत्र पूरी तरह वाशआउट रहा, जिसका प्रमुख कारण प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की सदन से लगातार अनुपस्थिति और विपक्ष के सवालों का सामना करने से बचना था। उन्होंने कहा कि पूरे 18 दिनों तक कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठकें हुईं, जिससे अभूतपूर्व विपक्षी एकजुटता देखने को मिली।

जयराम रमेश ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान खान एवं खनिज और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक बिना चर्चा के पारित हुए, जो संविधान के खिलाफ हैं और इन्हें सुप्रीम कोर्ट में जरूर चुनौती दी जाएगी। दोनों विधेयकों को खतरनाक केंद्रीकरण वाला बताते हुए उन्होंने कहा कि इनके तहत सभी राज्यों के संवैधानिक अधिकार छीने जा रहे हैं और केंद्र सरकार की भूमिका को और बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विपक्ष की मांग थी कि ये विधेयक स्थायी समिति में भेजे जाएं, लेकिन इस मांग को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने खुशी जताई कि विपक्ष के दबाव के चलते सरकार को भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक को स्थाई समिति में भेजना पड़ा।

जयराम रमेश ने सदन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमित शाह संसद परिसर में आते थे और अपने कमरे में बैठकर समाचार की खेती करते थे। चंदा चोरी का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फरवरी 2020 को लोकसभा में गर्व से बताया था कि उन्होंने अयोध्या में एक ट्रस्ट का गठन किया है। आज जब उस ट्रस्ट पर सवाल उठ रहे हैं तो कहा जा रहा है कि यह प्रदेश का विषय है, संसद में चर्चा कैसे हो सकती है। उन्होंने पूछा कि अगर ऐसा है तो नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ट्रस्ट के गठन का श्रेय क्यों लिया था?

वहीं, गौरव गोगोई ने कहा कि मानसून सत्र की शुरुआत में ही विपक्ष ने देश से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने की मांग की थी। इनमें नीट पेपर लीक, श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी, पेट्रोल में इथेनॉल मिलावट, विदेश नीति और चीन के साथ सीमा विवाद, ढहता पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तथा मध्य प्रदेश व अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप शामिल थे।

गोगोई ने कहा कि छात्रों के देशव्यापी आंदोलन के कारण ही शिक्षा मंत्री को अपना इस्तीफा देना पड़ा और सरकार दो साल पुराने कानून में संशोधन लाने को मजबूर हुई। गोगोई ने तंज कसते हुए कहा कि सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पर दो दिनों की चर्चा के दौरान न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में आए और न ही गृहमंत्री अमित शाह। सत्र के अंत में कुंभकर्णी नींद से जागे गृहमंत्री बयान देने के बजाय चर्चा का बहाना बनाते दिखे, लेकिन उन्होंने यह जवाब नहीं दिया कि छात्रों पर पैलेट गन चलाने और बर्बरता करने के आदेश किसने दिए थे।

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