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पाकिस्तान में US-ईरान वार्ता: क्या शांति की राह खुलेगी या फिर बढ़ेगा वैश्विक तनाव संकट

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का केंद्र बन गई है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच बेहद अहम बातचीत होने जा रही है। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब मिडिल ईस्ट में हालात नाजुक बने हुए हैं और हाल ही में लागू हुआ सीजफायर पूरी तरह स्थिर नहीं माना जा रहा।

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करीब 40 दिनों तक चले तनाव के बाद युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन अब भी कई मुद्दे ऐसे हैं जो इस शांति प्रक्रिया को कमजोर कर रहे हैं। खासकर लेबनान और हिज़्बुल्लाह को लेकर चल रहा विवाद इस बातचीत के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ विशेष दूत और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। वहीं, ईरान की तरफ से आधिकारिक प्रतिनिधियों के नाम स्पष्ट नहीं किए गए हैं, लेकिन यह माना जा रहा है कि शीर्ष स्तर के नेता इस वार्ता का हिस्सा बन सकते हैं।

इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति स्थापित करना है। हालांकि, इसके लिए कई कठिन शर्तें सामने रखी गई हैं। अमेरिका की ओर से तैयार प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण, यूरेनियम भंडार को सीमित करने और सैन्य गतिविधियों पर रोक जैसी मांगें शामिल बताई जा रही हैं। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने का मुद्दा भी बेहद अहम है, जो वैश्विक व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

वहीं, ईरान ने भी अपनी शर्तें स्पष्ट कर दी हैं। उसका कहना है कि जब तक लेबनान में पूरी तरह युद्धविराम लागू नहीं होता और विदेशों में रोकी गई उसकी आर्थिक संपत्तियां वापस नहीं मिलतीं, तब तक बातचीत आगे बढ़ाना मुश्किल होगा। पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में एक अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और वह लेबनान को भी इस समझौते में शामिल करने के पक्ष में है। लेकिन अमेरिका और इजरायल इस मुद्दे पर अलग रुख रखते हैं, जिससे मतभेद और गहरे हो गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। खासकर तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह बातचीत शांति की दिशा में ठोस कदम साबित होगी या फिर मौजूदा तनाव को और बढ़ा देगी। आने वाले कुछ दिन इस पूरे घटनाक्रम के लिए बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं।

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