सोशल संवाद/डेस्क : Antibiotic Resistance भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। हाल ही में एक मेडिकल कॉलेज में की गई रिसर्च में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कई आम संक्रमणों पर अब एंटीबायोटिक दवाएं पहले जैसा असर नहीं दिखा रही हैं। इसका मतलब यह है कि जिन दवाओं से डॉक्टर सालों तक मरीजों का इलाज करते रहे, अब वे कई मामलों में बेअसर साबित हो रही हैं। शोधकर्ताओं ने इसे हेल्थ सिस्टम के लिए आने वाले समय का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट बताया है।

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क्या है Antibiotic Resistance?
Antibiotic Resistance दरअसल वह स्थिति है जब बैक्टीरिया किसी संक्रमण के इलाज में दी जाने वाली दवाओं के खिलाफ मज़बूत हो जाते हैं। यानी शरीर में घुसकर बीमारी फैलाने वाले सूक्ष्म जीव (बैक्टीरिया) खुद को दवाओं से बचाने के तरीके सीख लेते हैं। इसके बाद वे दवाओं के असर को नष्ट कर देते हैं, जिससे एंटीबायोटिक दवाएं सही ढंग से काम नहीं कर पातीं।

डॉक्टरों के अनुसार आज जिन सामान्य बीमारियों के लिए एंटीबायोटिक दवा दी जाती है, कल को वही बीमारी बड़ी सर्जरी या लंबा इलाज मांग सकती है। यही वजह है कि चिकित्सा विशेषज्ञ सालों से एंटीबायोटिक के सीमित और समझदारी भरे उपयोग पर ज़ोर देते आ रहे हैं।
स्टडी में मिले चौंकाने वाले संकेत
ताज़ा अध्ययन में पता चला कि कई गंभीर और लंबे समय तक इलाज योग्य संक्रमणों में दवा का असर तेजी से घट रहा है।
- यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन
- न्यूमोनिया
- आंतों के संक्रमण
- फूड पॉइजनिंग
- स्किन इंफेक्शन
जैसे रोगों में मरीजों पर कई सामान्य एंटीबायोटिक अब पूरी तरह से प्रभावी नहीं रहे हैं। डॉक्टरों को मजबूरन हाई पावर एंटीबायोटिक की ओर हाथ बढ़ाना पड़ रहा है।
तेजी से क्यों बढ़ रहा है खतरा?
हेल्थ विशेषज्ञों ने Antibiotic Resistance के पीछे कई वजहें बताई हैं
- एंटीबायोटिक दवाओं का ज्यादा और बेवजह उपयोग
अक्सर खांसी, सर्दी या वायरल में भी लोग डॉक्टर पूछे बिना दवा खा लेते हैं। - दवा का पूरा कोर्स न करना
मरीज लक्षण कम होते ही दवा अचानक छोड़ देते हैं। इससे बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं होता और अधिक मजबूत होकर वापसी करता है। - दवाओं की क्वालिटी में गिरावट
सस्ती या मिलावटी दवाएं भी असर कम करती हैं। - पशु और कृषि क्षेत्र में दवाओं का उपयोग
मुर्गी, मछली और खेती में Antibiotic देने से भी इंसानों में यह प्रतिरोध पहुंचता है।
क्या कहती है चिकित्सा बिरादरी?
विशेषज्ञों ने कहा कि यदि अब भी एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में छोटी-सी बीमारी भी जानलेवा हो सकती है। कई देशों में डॉक्टर मरीजों को Antibiotic की जगह केवल जरूरत पड़ने पर ही दवाई लिखने की सलाह दे रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी की श्रेणी में रख चुका है।

आम लोग क्या सावधानी बरतें?
- डॉक्टर की सलाह के बिना Antibiotic न लें
- पूरी दवा का कोर्स समय पर पूरा करें
- बुखार, खांसी, सर्दी में स्वयं दवा न खाएं
- संक्रमण से बचाव के लिए हाथ धोने और साफ-सफाई पर ध्यान दें
- बीमारी के सही कारण की जांच कराएं
अंत में सावधान रहने की जरूरत
Antibiotic Resistance की समस्या केवल अस्पताल या डॉक्टर तक सीमित नहीं है। यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग केवल जरूरत पड़ने पर ही किया जाए। यह समस्या जितनी शांत दिखाई देती है, उतनी ही खतरनाक है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदारी नहीं दिखाई गई, तो भविष्य में दवाओं का दौर ही खत्म हो सकता है और साधारण बीमारी का इलाज मुश्किल बन जाएगा।










