सोशल संवाद / जमशेदपुर : दोमुहानी डंपिंग यार्ड में वर्षों से जमा कचरे के निष्पादन की प्रक्रिया अक्तूबर में शुरू होने की उम्मीद है। जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) ने पुराने कचरे को हटाने के लिए 11.05 करोड़ रुपये की नई योजना पर टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बार बायो-माइनिंग तकनीक से कचरे को छांटकर उपयोगी सामग्री अलग की जाएगी और कचरा हटने के बाद जमीन का समतलीकरण कर उसे विकसित किया जाएगा।
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दोमुहानी डंपिंग यार्ड में करीब 50 हजार टन कचरा जमा है। वर्षों से यहां जेएनएसी और मानगो क्षेत्र का कचरा डंप किया जाता रहा है। कचरे के कारण सुवर्णरेखा और खरकई नदी के संगम क्षेत्र में प्रदूषण का खतरा बना हुआ है। गर्मी के दिनों में कचरे में आग लगने से जहरीला धुआं भी आसपास के इलाकों में फैलता है। इससे पहले वर्ष 2023 में कचरा हटाने के लिए 4.13 करोड़ की योजना बनाई गई थी। पुणे की गुरु रामदास कंस्ट्रक्शन कंपनी को काम सौंपा गया था और छह माह में कचरा हटाने का दावा किया गया था।
कंपनी ने कचरा छंटाई के लिए मशीनें भी लगाई :
कंपनी ने कचरा छंटाई के लिए मशीनें भी लगाईं, लेकिन योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी। दो साल बाद भी डंपिंग यार्ड में कचरे का ढेर बना हुआ है। नई योजना में पुराने कचरे की बायो-माइनिंग, उपयोगी एवं रिसाइकिल सामग्री की छंटाई और जमीन का सुधार किया जाएगा। जेएनएसी की तैयारी है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही अक्तूबर में कचरा निष्पादन का काम शुरू कराया जाए। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की कोलकाता पीठ ने वर्ष 2022 में डंपिंग डंपिंग यार्ड हटाने और नदी संगम को प्रदूषण मुक्त रखने का निर्देश दिया था। नई योजना से उम्मीद है कि लंबे समय से लंबित समस्या के समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई शुरू होगी।
कचरा निष्पादन की तैयारी शुरू कर दी गई है। इससे शहर की स्वच्छता में में भी सुधार होगा। पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है।
– योगेंद्र प्रसाद, नगर आयुक्त, जेएनएसी










