सोशल संवाद/डेस्क : देश को इस साल सूखा झेलना पड़ सकता है। भारतीय मौसम विभाग ने शुक्रवार को आधिकारिक रूप से अपने संशोधित पूर्वानुमान में कहा है कि इस साल मानसून के दौरान औसत बारिश की तुलना में 10% कम बारिश हो सकती है। अलनीनो परिस्थितियां विकसित होने को इसका प्रमुख कारण बताया जा रहा है।

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विभाग ने अप्रैल में पहले पूर्वानुमान में कहा था कि मानसून के दौरान होने वाली सामान्य औसत जबकि शुक्रवार को पूर्वानुमान में संशोधन करते हुए कहा कि इस बार जून से सितंबर के दौरान औसत की 90 फीसदी बारिश हो सकती है। आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि इस पूर्वानुमान में 4% कम या ज्यादा रहने की संभावना है। यानी बारिश 86% भी रह सकती है। ऐसी स्थिति 10 साल बाद बन रही है। 2015 में मानसून 86% था।
मानसून केरल पहुंचने में एक सप्ताह और लगेगा
मानसून रेखा की अरब सागर ब्रांच कमजोर होने के चलते मानसून केरल में दस्तक नहीं दे पा रहा है। हालांकि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बारिश हो रही है। अगले तीन से चार दिन में मानसून के आगे बढ़ने की संभावना है। एक हफ्ते में यह केरल पहुंच सकता है।









