सोशल संवाद / डेस्क : आम लोगों की रसोई पर महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। चीनी के बाद अब गेहूं के दामों में भी तेजी दर्ज की गई है। पिछले एक महीने में गेहूं की कीमत में करीब 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी हुई है। थोक बाजार में गेहूं की बढ़ती कीमत का असर अब आटे के दाम पर भी दिखाई देने लगा है।
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व्यापारियों के मुताबिक, बाजार में गेहूं की आवक फिलहाल कम है। वहीं केंद्र सरकार की ओर से गेहूं के निर्यात से जुड़ी पाबंदियों में बदलाव और आगामी रबी सीजन के लिए MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित होने की उम्मीद को भी कीमतों में तेजी की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है।
मंडी से फ्लोर मिल तक गेहूं के दाम में तेजी
अनाज मंडी में इन दिनों गेहूं की कीमत 2,750 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। वहीं फ्लोर मिलों को वेयरहाउस से गेहूं की आपूर्ति करीब 2,850 रुपये प्रति क्विंटल तक हो रही है। थोक कारोबारियों का कहना है कि गेहूं की कीमतों में पिछले कुछ समय से लगातार मजबूती देखी जा रही है। मंडियों में गेहूं की आवक कम होने से भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
आटे के दाम पर भी असर
गेहूं महंगा होने का सीधा असर आटे की कीमतों पर पड़ रहा है। खुले बाजार में चक्की का आटा करीब 35 से 36 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है।
वहीं 10 किलोग्राम के नॉन-ब्रांडेड आटे के पैकेट की कीमत करीब 350 से 360 रुपये है। दूसरी ओर 10 किलोग्राम ब्रांडेड आटा 390 से 440 रुपये तक बिक रहा है। थोक बाजार में 44 किलोग्राम आटे की बोरी की कीमत करीब 1,450 रुपये तक बताई जा रही है।
गेहूं की कीमत बढ़ने की क्या है वजह?
गेहूं के दाम में तेजी के पीछे कारोबारियों ने कई कारण बताए हैं। पहला कारण गेहूं के निर्यात को लेकर केंद्र सरकार के फैसले को माना जा रहा है। निर्यात की अनुमति से बाजार में मांग बढ़ने की संभावना के चलते कीमतों में तेजी आई है।
दूसरा कारण आगामी रबी सीजन के लिए गेहूं का MSP बढ़ने की उम्मीद है। कारोबारियों के अनुसार अगर सरकार पिछले सीजन की तुलना में ज्यादा MSP घोषित करती है, तो बाजार में गेहूं की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है।
पिछले सीजन में कितना था गेहूं का MSP?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अप्रैल 2026 में किसानों को गेहूं के लिए 2,585 रुपये प्रति क्विंटल MSP मिला था। यह वर्ष 2025 की तुलना में 160 रुपये प्रति क्विंटल अधिक था। अब आगामी रबी सीजन के लिए नए MSP की घोषणा का इंतजार है। बाजार से जुड़े कारोबारियों को उम्मीद है कि नया समर्थन मूल्य पिछले सीजन की तुलना में अधिक हो सकता है।
कारोबारियों ने क्या कहा?
आटा, मैदा और सूजी के थोक विक्रेता एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित जैन के मुताबिक गेहूं की कीमत में होने वाला उतार-चढ़ाव बाजार की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। उनके अनुसार बाजार में गेहूं और उससे बनने वाले आटा, सूजी तथा मैदा की आपूर्ति फिलहाल जारी है।
वहीं मंडी समिति गंगोह के आढ़ती प्रदीप तायल का कहना है कि वेयरहाउस का गेहूं करीब 2,850 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। इसमें टैक्स और बारदाने समेत अन्य खर्च शामिल हैं। फिलहाल मंडी में गेहूं की आवक कम है, लेकिन आगे बाजार बेहतर रहने की उम्मीद है।
क्या आगे और बढ़ सकते हैं गेहूं के दाम?
बाजार कारोबारियों के मुताबिक, गेहूं के दाम में आगे भी तेजी या उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निर्यात नीति और आगामी गेहूं MSP की घोषणा बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। अगर MSP में बढ़ोतरी होती है और बाजार में गेहूं की आवक अपेक्षाकृत कम रहती है, तो कीमतों पर आगे भी दबाव बन सकता है। इसका असर आटा, मैदा और सूजी जैसे रोजमर्रा के खाद्य उत्पादों पर भी पड़ने की संभावना है।
Wheat Price Hike: आम आदमी की रसोई पर बढ़ सकता है बोझ
चीनी के बाद गेहूं की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। गेहूं भारतीय घरों में रोजमर्रा की जरूरत का प्रमुख खाद्य पदार्थ है। ऐसे में गेहूं और आटे की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने पर इसका सीधा असर आम परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
फिलहाल बाजार की नजर सरकार की आगामी MSP घोषणा, गेहूं की मंडी आवक और निर्यात नीति पर टिकी हुई है।









