सोशल संवाद / डेस्क : नवंबर की शुरुआत होते ही मौसम में बदलाव महसूस होने लगता है। सुबह-शाम की ठंड, हवा में नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच कई लोगों को लगातार छींक आने, नाक बहने, आंखों में खुजली और नाक बंद होने जैसी परेशानियां होने लगती हैं। अक्सर लोग इसे सामान्य सर्दी-जुकाम समझ लेते हैं, लेकिन कई मामलों में इसकी वजह मौसमी एलर्जी यानी एलर्जिक राइनाइटिस हो सकती है।
नवंबर में क्यों बढ़ने लगती है एलर्जी?
मौसम बदलने के साथ वातावरण में मौजूद कई एलर्जी पैदा करने वाले तत्व सक्रिय हो सकते हैं। ठंडी और शुष्क हवा सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकती है। वहीं, घरों में ज्यादा समय बिताने से धूल के कण, डस्ट माइट्स, पालतू जानवरों के बालों से निकलने वाले कण और फफूंद के संपर्क में आने की संभावना बढ़ जाती है।
इसके अलावा हवा में मौजूद परागकण और मौसम में बदलाव भी संवेदनशील लोगों में एलर्जी के लक्षण बढ़ा सकते हैं। जिन लोगों को पहले से एलर्जी या अस्थमा की समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
सर्दियों की एलर्जी के प्रमुख लक्षण
एलर्जी होने पर शरीर में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
- बार-बार छींक आना।
- नाक में खुजली या नाक बहना।
- नाक बंद रहना और सांस लेने में परेशानी।
- आंखों में खुजली, लालिमा और पानी आना।
- गले में खुजली या खांसी होना।
- रात में परेशानी बढ़ने से नींद प्रभावित होना।
सर्दियों की एलर्जी से बचने के 6 आसान उपाय
1. घर की नियमित सफाई करें
घर में जमा धूल, मिट्टी और फफूंद एलर्जी की परेशानी बढ़ा सकते हैं। इसलिए फर्श और फर्नीचर की नियमित सफाई करें। धूल साफ करने के लिए सूखे कपड़े की जगह गीले कपड़े का इस्तेमाल करें।
2. बिस्तर और चादरों को साफ रखें
तकिए, गद्दे और चादरों में डस्ट माइट्स जमा हो सकते हैं। बिस्तर की चादरें और तकिए के कवर नियमित रूप से धोएं। संभव हो तो गर्म पानी का इस्तेमाल करें और बिस्तर को अच्छी तरह सुखाएं।
3. बाहर से आने के बाद कपड़े बदलें
बाहर से घर लौटने पर कपड़ों और बालों के साथ परागकण और धूल के कण भी घर के अंदर आ सकते हैं। इसलिए बाहर से आने के बाद कपड़े बदलें और हाथ-मुंह अच्छी तरह धो लें। जरूरत हो तो नहाएं भी।
4. घर में हवा और नमी का संतुलन रखें
घर के उन हिस्सों पर विशेष ध्यान दें जहां नमी रहती है, जैसे बाथरूम और रसोई। दीवारों पर फफूंद दिखाई देने पर उसे साफ करवाएं और पानी जमा न होने दें। जरूरत के अनुसार एयर प्यूरीफायर और HEPA फिल्टर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
5. एलर्जी बढ़ाने वाले कारकों से दूरी रखें
अगर धूल, पालतू जानवरों के बाल या किसी खास तरह के परागकण से एलर्जी होती है, तो उनके संपर्क को कम करने की कोशिश करें। अधिक धूल या परागकण वाले वातावरण में मास्क पहनना मददगार हो सकता है।
6. लक्षण बढ़ने पर डॉक्टर से सलाह लें
लगातार छींक, नाक बंद रहने या आंखों में खुजली की समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत के अनुसार डॉक्टर एंटीहिस्टामिन, नेजल स्प्रे या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं। बिना सलाह के लंबे समय तक दवाओं का इस्तेमाल न करें।
एलर्जी और सर्दी-जुकाम में कैसे करें अंतर?
एलर्जी और सामान्य सर्दी-जुकाम के लक्षण एक जैसे हो सकते हैं, लेकिन कुछ अंतर इन्हें पहचानने में मदद करते हैं। एलर्जी में अक्सर बार-बार छींक, नाक और आंखों में खुजली तथा साफ पानी जैसा नाक बहना देखने को मिलता है। इसमें आमतौर पर बुखार नहीं होता और लक्षण एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों के संपर्क में रहने तक बने रह सकते हैं।
वहीं, सर्दी-जुकाम में गले में दर्द, शरीर में दर्द और कभी-कभी बुखार भी हो सकता है। इसके लक्षण सामान्यतः कुछ दिनों में ठीक होने लगते हैं। अगर परेशानी लंबे समय तक बनी रहे या सांस लेने में दिक्कत हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
ध्यान दें: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। एलर्जी के लक्षण गंभीर हों, अस्थमा बढ़े या सांस लेने में परेशानी हो तो चिकित्सकीय सलाह जरूर लें।











